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रक्तिम तिवारी/अजमेर.
मौसम पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव पडऩे लगा है। इस साल जून तक मौसम में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि, अंधड़ और तापमान में असामान्य बढ़ोतरी संभव है।
2019 की शुरुआत से भारत सहित अधिकांश देश कड़ाके की ठंडक, बर्फबारी से प्रभावित है। ऑस्ट्रेलिया में तो राजस्थान जैसे अंधड़ शुरू हो चुके हैं। ग्लोबल वार्मिंग का मौसम में असर दिख रहा है। सर्दी में राजस्थान के कई जिलों में न्यूनतम पारा माइनस डिग्री तक पहुंच गया है। अजमेर जैसे शहर का तापमान भी 4 डिग्री तक पहुंच गया था। मौसम विभाग की मानें तो ठंड का का दायरा इस बार मार्च तक रहने की उम्मीद है। जबकि सामान्य तौर पर मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के बाद हल्की गर्मी मौसम में दस्तक दे देती है। लेकिन मार्च तक प्रशांत महासागर में ला-नीना की गति तेज होने की उम्मीद है।
बेमौसम बारिश-ओले
पश्चिमी विक्षोभ के कारण जनवरी से जून के मध्य बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि होने की भी संभावना है। इस दौरान कभी बर्फीली हवाएं तो तभी तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। तेज गर्मी, लू के साथ-साथ तापमान में बदलाव भी देखने को मिलेगा।
सात साल से नहीं पर्याप्त बरसात
अजमेर जिले में बीते सात साल से पर्याप्त बरसात नहीं हो रही। पिछले साल 1 जून से 30 सितम्बर तक महज 350 मिलीमीटर बरसात हुई। जबकि जिले की औसत बरसात 550 मिलीमीटर मानी जाती है। 2012 से 2018 तक जिले में बरसात का यह आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। जिले के राजियावास, बीर, मूंडोती, पारा प्रथम और द्वितीय, बिसूंदनी सहित कई जलाशयों में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई।
किसको मानें सही...
सिंचाई विभाग जयपुर रोड और मौसम विभाग रामगंज में है। दोनों विभाग बरसात रिकॉर्ड करते हैं। सिंचाई विभाग ने पिछले साल सितम्बर तक 350 और मौसम विभाग ने 410 मिलीमीटर बरसात मापी। दोनों के वर्षा मापी यंत्र अलग-अगल क्षेत्रों में है। ऐसे में कौनसे आंकड़े को सही माना जाए यह जल संसाधन और सिंचाई विभाग को तय करना है।