
खण्डार. जैतपुर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर करीब एक हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। प्राचीन मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन मास में यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूरे सावन मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहता है।श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। सावन के दौरान मंदिर में सामूहिक अभिषेक भी किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। विशेषकर सावन के सोमवार को मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक मान्यता के कारण आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। वर्षभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है, लेकिन सावन के दौरान यहां विशेष रौनक रहती है। महिलाएं, युवा और अन्य श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना व अभिषेक में भाग लेते हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सावन में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के संरक्षण और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार से यहां आने वाले लोगों को और बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।
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