
अजमेर। राजस्थान में व्यापार और उद्योग के लिए अब एक नया लॉजिस्टिक्स हब तैयार हो गया है। अदाणी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड ने किशनगढ़ में अपने लॉजिस्टिक्स पार्क और इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) का उद्घाटन किया, जो राज्य का सबसे बड़ा आईसीडी है।
यह फैसिलिटी 100 एकड़ में फैली है, जिसमें से 35 एकड़ पहले ही विकसित हो चुके हैं। मंडावरिया गांव, हर्मारा रोड पर स्थित यह आईसीडी-राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम लिमिटेड से 4 किमी और एनएच 8 से 5 किमी की दूरी पर है। भारतीय रेलवे नेटवर्क से मंडावरिया स्टेशन और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से न्यू मारवाड़ जंक्शन से जुड़ी होने के कारण, राज्य और देश के व्यापारिक मार्गों में तेज और कुशल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है।
आईसीडी की सालाना हैंडलिंग क्षमता 80,000 टीईयू है। यह मुंद्रा, कोस्सिपोर, जिरानिया और खिद्दरपुर जैसे प्रमुख बंदरगाहों से सीधे रेल कनेक्टिविटी प्रदान करता है। तीन पूर्ण लंबाई की रेल लाइनें, 11,300 वर्ग फुट का वेयरहाउस, दो 45 MT रीच स्टैकर और चार इंटरनल ट्रांसफर व्हीकल (आईटीवी) इसे अत्याधुनिक बनाते हैं। 80 एमटी स्थिर और 100 एमटी इन-मोशन वेइब्रिज, सीसीटीवी निगरानी, कंट्रोल रूम, कस्टम्स और सीएचए कार्यालय, कैंटीन और ड्राइवर रेस्ट एरिया जैसी सुविधाएं संचालन को और प्रभावी बनाती हैं।
आईसीडी रिटेल, इंडस्ट्रियल, बल्क, ब्रेक-बुल्क, लिक्विड, ऑटो और एग्री-ग्रेन कार्गो को संभाल सकता है। इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और बिल्ट-टू-सूट समाधान भी उपलब्ध हैं। इससे राजस्थान के बढ़ते औद्योगिक क्लस्टर्स को नई गति मिलेगी और राज्य की लॉजिस्टिक्स अवसंरचना पर दबाव कम होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि किशनगढ़ आईसीडी न केवल राजस्थान के औद्योगिक उत्पादन और एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा, बल्कि देश के व्यापार नेटवर्क और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
एक्सपर्ट का कहना है कि रोजगार सृजन और नए निवेश आकर्षित करने की संभावनाओं के कारण यह परियोजना राज्य और देश दोनों के लिए आर्थिक दृष्टि से अहम साबित होगी। अदाणी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के अनुसार, किशनगढ़ आईसीडी विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। 11 जून 2024 को केंद्रीय अप्रत्यक्ष टैक्स और कस्टम बोर्ड से हासिल लेटर ऑफ इंटेंट के साथ यह परियोजना अदाणी लॉजिस्टिक्स की भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नेतृत्व की एक नया मील का पत्थर है।