अजमेर

Industry Feedback: नियमों-शर्तों को बनाएं सरल, तभी चल सकेंगी इंडस्ट्री

उद्यम विकास के लिए नियमों-शर्तों में सरलीकरण का आग्रह किया है।
2 min read
May 02, 2020
industrial development
industrial development

अजमेर.

लघु उद्योग भारती ने केंद्र और राज्य सरकार से उद्यम विकास के लिए नियमों-शर्तों में सरलीकरण का आग्रह किया है। अध्यक्ष अजीत अग्रवाल और सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि भारत सहित कई देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशानुसार पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया है।

इससे औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप है। मॉडिफाइड लॉकडाउन में फैक्ट्री-कारखाने में श्रमिकों को बगैर कटौती के वेतन, श्रमिकों की रहने-खाने की व्यवस्था, सोशल डिस्टेंसिंग जैसी शर्तें लगाई गई है। प्रधानमंत्री सहायता कोष और मुख्यमंत्री सहायता कोष में भी करोड़ों की राशि उद्योगों ने दी है।

दिए यह सुझाव..
-श्रमिकों को उद्योगों को समायोजन कर भुगतान
-स्टाफ और मज़दूरों के भुगतान सरकार के तय न्यूनतम दर से कम होने पर ही कार्रवाई की जाए। कंपनी के पिछले पैरोल से तुलना कर कार्रवाई ना हो।
-जो श्रमिक फैक्ट्री बंद होने की स्थिति में गांव जाना चाहते हैं उनकी व्यवस्था करें
-छह महीने तक सरकार व्यापारी तथा उद्यमी को किसी तरह का नोटिस या कार्यवाही ना दे
-औद्योगिक क्षेत्रों में विकास और अन्य व्यवस्थाओं को बनाएं सरल और सुगम

Read More: Big Issue: इस साल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव मुश्किल
पहले यूजी क्लासेज की परीक्षाएं, फिर पीजी का नम्बर

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय बकाया परीक्षाओं की तैयारी में जुटा है। जून में स्नातक स्तरीय परीक्षाएं पहले होंगी। इसके बाद स्नातकोत्तर स्तर की परीक्षाएं कराई जाएंगी।

कोरोना लॉकडाउन के चलते विश्वविद्यालय को 19 मार्च से स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं। उच्च शिक्षा विभाग और राजभवन ने 15 जून या इसके बाद बकाया परीक्षाएं कराने को कहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय अपनी तैयारी में जुटा है।

ताकि विद्यार्थियों को नहीं हो परेशानी
परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुब्रतो दत्ता ने बताया कि जून में सबसे पहले बीए, बीएससी, बी.कॉम तृतीय वर्ष और अन्य परीक्षाएं कराई जाएंगी। इससे विद्यार्थियों को प्री.बीएड, एलएलबी और अन्य संस्थानों के कोर्स में दाखिले लेने में परेशानी नहीं होगी। एम.ए, एमएससी, एम.कॉम और अन्य स्नातकोत्तर परीक्षाएं इनके बाद कराई जाएंगी।

..तो बदलने पड़ेंगे पेपर पैटर्न
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को तीन के बजाय दो घंटे में पेपर कराने को कहा है। इससे विश्वविद्यालयों को पेपर पैटर्न बदलना पड़ सकता है। पेपर में लघु उत्तर, उत्तरों की शब्द सीमा निर्धारित करने सहित मल्टीपल च्वॉइस क्वेश्चन बढ़ाने पड़ सकते हैं।

Updated on:
02 May 2020 08:53 am
Published on:
02 May 2020 08:53 am