
मुनि प्रसन्नसागर के ससंघ सान्निध्य में 10 से 14 मार्च तक पंचायत बड़ा धड़ा नसियां में जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, विश्व शांति महायज्ञ एवं रथयात्रा महोत्सव होगा। इसके तहत का मुनि प्रसन्नसागर का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। यहां 203 साल बाद ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
मुनि प्रसन्न सागर, मुनि पीयूषसागर का ससंघ जुलूस केसरगंज स्थित जैन मन्दिर से प्रारम्भ हुआ। बैंड बाजे मधुर स्वरलहरियों और ढोल-ढमाकों के साथ घोड़े-बग्गियां भी जुलूस में साथ चले। जैन महिला बैंड भी धुनें प्रस्तुत करता चला।
इस दौरान दिगम्बर जैन महिला समितियों की विभिन्न इकाइयों की सदस्य कलश लिए चलीं। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। जुलूस स्टेशन रोड, मदार गेट, गांधी भवन, चूड़ी बाजार, नया बाजार, आगरा गेट होता हुआ बड़ा धड़ा पंचायत नसियां में पहुंचा। अध्यक्ष प्रदीप पाटनी, पदमचंद सोगानी, कमल गंगवाल, प्रदीप पाटनी, बसंत सेठी, अनिल गदिया, कमल गंगवाल, नरेन्द्र गोधा, नितिन दोसी, लोकेश ढिलवारी, मुकेश पाटोदी, मनीष सेठी, सुनिल बडज़ात्या, अरुण सेठी, जितेन्द्र कासलीवाल, विनीत जैन और अन्य साथ रहे।
पाद प्रक्षालन और स्वागत
मंगल प्रवेश जुलूस की अगवानी के लिए पूरे मार्ग में स्वागत तोरण द्वार लगाए गए। जुलूस के मार्ग में विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं घरों के बाहर मुनि प्रसन्न सागर ससंघ की आरती की गई। अजमेर जिला वैश्य महासम्मेलन के पदाधिकारियों ने पाद प्रक्षालन एवं आरती की। अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा, महामंत्री उमेश गर्ग, कोषाध्यक्ष प्रवीण जैन, संरक्षक डॉ. विष्णु चौधरी, युवा महामंत्री अंकुर मित्तल, युवा अध्यक्ष पृष्पेन्द्र पहाडिया, दिनेश परनामी और अन्य मौजूद थे।
203 साल बाद होगा महोत्सव
अजमेर में करीब 203 साल बाद पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। इसके तहत 10 से 14 मार्च तक जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, विश्व शांति महायज्ञ और अन्य कार्यक्रम होंगे। प्रवक्ता कमल गंगवाल ने बताया कि प्रथम दिन गर्भ कल्याणक के दिन ध्वजारोहण, घटयात्रा, मंडप एवं वेदी शुद्धि होगी। दूसरे दिन जन्मकल्याणक के तहत सौधर्म इंद्र द्वारा 1 हजार नेत्रों से जिन बालक के दर्शन, पालना झुलाना क्रिया, तीसरे दिन दीक्षा कल्याणक के तहत भगवान का राज कन्याओं से विवाह, राज्याभिषेक, चौथे दिन ज्ञान कल्याण के दिन भगवान का कौशाम्बी नगर के मंगलपुरी में महाराज सोमदत्त के घर आहार, पांचवें दिन मोक्ष कल्याणक के दिन केवलज्ञान कल्याणक पूजा के बाद भगवान विराजमान किए जाएंगे।
आंतरिक ब्रह्म से समझें पंच कल्याणक
मुनि प्रसन्न सागर ने प्रवचन में कहा कि पंच कल्याणकों का उद्देश्य आत्मा से परमात्मा बनने की कला को सीखने का होना चाहिए। पंच कल्याणक को हम आंतरिक ब्रह्म से समझ सकते हैं। आत्म कल्याणक में इस उत्सव को साधन बनाना चाहिए। पंचकल्याणक की विधि प्रत्यक्ष देखने और घटना विशेष से परिणामों में निर्मलता आती है। यह सम्यकत्व प्राप्ति में भी निमित बन सकती है। महापौर धर्मेन्द्र गहलोत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन भाजपा देहात अध्यक्ष बी.पी.सारस्वत, पार्षद नीरज जैन और अन्य ने श्रीफल भेंट किए। अशोक साहबजाज, अभय कुमार साहबजाज, ज्ञानचंद गदिया, मनोज कोलानायक, टीकमचंद पाटनी, मुकेष पाटोदी, प्रेमचंद पाटनी, सुनिल गंगवाल, ताराचन्द सेठी, त्रिलोकचंद सोनी, धनकुमार लुहाडिया, अनिल गदिया, रोहित बाकलीवाल, राजीव निराला, जे.के.पाटनी, सोनू पहाडिय़ा, संजय बाकलीवाल, माणकचंद जैन, मनीष अजमेरा और अन्य मौजूद थे।
जुलूस में दिगम्बर जैन महासमिति महिला संभाग की मधु पाटनी, आशा पाटनी के अलावा हाथी एवं बग्गियों पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य पात्र - कैलाशचंद बडज़ात्या कोलकाता, संदीप-संगीता बडजात्या कोलकाता, प्रदीप-सरस्वती पाटनी, मोहिनी देवी गंगवाल, राजकुमारी गंगवाल, मनोज-रूपश्री मोडासिया, महावीर लुहाडिय़ा, शिखरचंद पवनकुमार गदिया, बीना टोंग्या सवार हुए। दोपहर में स्वाध्याय, गुरुपूजा, आनंद यात्रा हुई। संचालन नरेंद्र गोधा ने किया। ईश दौरान आदिनाथ जन्म जयंती के लिए श्रीफल भेंट किए गए।