
सुरेश लालवानी/अजमेर।
भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों की गति में इजाफा करने के साथ यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब सभी ट्रेनों में अत्याधुनिक एलएचबी कोच लगाने की कवायद शुरू की जा रही है। फिलहाल यह कोच देश की अधिकतर शताब्दी, दुरंतो और आश्रम एक्सप्रेस में लगाए जा चुके हैं।
एलएचबी कोच सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक उपयोग माने जाते हैं। अमूमन मौजूदा कोच टक्कर अथवा पटरी से उतरने के दौरान टेड़े मेढ़े हो जाते है या फिर पिचक जाते है। इससे यात्रियों के हताहत होने की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है। नए एलएचबी कोच को इस लिहाज से काफी सुरक्षित माना जाता है।
जर्मनी से किए थे आयात
भारतीय रेल ने सुरक्षित संचालन के लिहाज से वर्ष 2000 में लिंके होफमेन बुच (एलएचबी ) जर्मनी से 24 कोच प्रयोगात्मक तौर पर आयात किए थे। सबसे पहले इन कोचों को शताब्दी एक्सप्रेस में लगाया गया। बेहतर परिणाम पाए जाने पर एलएचबी कोच का निर्माण रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में प्रारंभ कर दिया गया। कोच की उपलब्धता के साथ -साथ देश में चल रही सभी शताब्दी, राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस में पुराने कोच हटाकर एलएचबी कोच लगाए गए हैं।
यह है विशेषताएं
नए एलएचबी कोच सुरक्षित होने के साथ तेज रफ्तार के लिए भी उपयोगी है। यह कोच 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग सकते हैं। आकस्मिक स्थिति में ब्रेक लगाने पर भी यह कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। यात्रा के दौरान अन्य कोच की तुलना में एलएचबी कोच में बाहरी शोर काफी कम सुनाई देता है। यही नहीं, अत्यधिक गति में भी इन कोच में बैठे यात्रियों को धचके अपेक्षाकृत काफी कम महसूस होते हैं। स्टील के बने इन कोच में पुराने कोच की तुलना में एसी सिस्टम भी काफी शक्तिशाली है।
पुराने कोच अगले साल बंद
रेलवे अधिकारियों के अनुसार देश में स्थित रेलवे कोच फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच के निर्माण की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। 2018 से मौजूदा पुराने आईसीएफ कोच का निर्माण बंद कर दिया जाएगा। पुराने कोच में भी सुरक्षा की दृष्टि से काफी फेरबदल किए जाएंगे।