Ajmer News - Muharram : मोहर्रम के दौरान मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में तकरीर करने वाले मौलानाओं पर पुलिस और दरगाह कमेटी की नजर रहेगी। तकरीर करने वालों को पहले से बताना होगा कि वे क्या तकरीर करेंगे। मोहर्रम व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में अजमेर पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने यह निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं तकरीर करने वाले और कराने वालों को पहले से दरगाह कमेटी के पास आईडी जमा करानी होगी।
अजमेर. मोहर्रम (muharram) के दौरान मुस्लिम (muslim) बहूल क्षेत्र में तकरीर करने वालो का ब्यौरा दरगाह कमेटी (dargah committee) और पुलिस (police) को पहले से रखना होगा। पुलिस अधीक्षक (sp ajmer) कुंवर राष्ट्रदीप (kunwar rashtradeep) ने मोहर्रम व्यवस्थाओं को लेकर हुई बैठक में यह निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मोहर्रम के दौरान दी जाने वाली तकरीर से कोई विवाद की स्थिति नहीं बने, इसलिए पहले से ही सावधानी बरती जाए।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मोहर्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में तकरीर होती है। ऐसे में तकरीर पेश करने वाले और उनको बुलाने वाले व्यक्ति या संगठन की पूर्व जानकारी रखी जाए। मौलाना की ओर से पढ़ी जाने वाली तकरीर भी पूर्व निर्धारित होनी चाहिए। इसमें सिर्फ धार्मिक तकरीर ही पढऩे की इजाजत दी जाए। किसी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं हो। उन्होंने कहा कि किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़े मौलाना को तकरीर पेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साम्प्रदायिक सौहाद्र्र बिगडऩे की स्थिति में संगठन और आयोजनकर्ता के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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200 साल से बना रहे हैं ताजिया
चांद दिखाई देने पर 1 या 2 सितम्बर से मोहर्रम की शुरूआत होगी। मोहर्रम करीब आते ही ख्वाजा साहब की दरगाह में अंजुमन की ओर से तैयार करवाया जा रहा सबसे बड़ा ताजिया शरीफ का निर्माण अंतिम चरण में है। दरगाह के बुलंद दरवाजे पर ताजिया बनाने का काम हाजी खलील अहमद और हाजी नफीस अहमद पिछले तीन महीने से कर रहे हैं। -200 साल से ताजिय़ा बना रहा है खलील और नफीस का परिवार
-3 महीने लगते हैं ताजिया बनाने में
-400 किलो के आस-पास वजन होता है ताजिया शरीफ का
-16 फीट लम्बाई का बनाया जाता है ताजिया शरीफ