जायरीन मिनी उर्स में हाजिरी देने पहुंचते हैं। इनके लिए कायड़ विश्राम स्थली में ठहराने के लिए खास इंतजाम भी किए गए हैं।
अजमेर. मोहर्रम (muhurraum) की रसूमात में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न स्थानों से जायरीन की आवक जारी है। इसके चलते अजमेर में मिनी उर्स (mini urs) दिख रहा है। ख्वाजा साहब की दरगाह में मोहर्रम की रस्में शुरू हो गई हैं। बुधवार को बाबा फरीद का चिल्ला (baba farid) खोल दिया गया। चिल्ला 72 घंटे तक खुला रहेगा।
खुला बाबा फरीद का चिल्ला
मोहर्रम के दौरान दरगाह (garib nawaz dargah) स्थित बाबा फरीद का चिल्ला खोला गया। परम्परानुरा चिल्ला साल में एक बार मोहर्रम की चार तारीख को खोला जाता है। इसकी जियारत के लिए देशभर से जायरीन (pilgrims) यहां पहुंचे हैं। यह चिल्ला (traditonal chilla) 72 घंटे के लिए खोला जाता है। मालूम हो कि बाबा फरीद ने 40 दिन तक अजमेर की दरगाह में चिल्ला (इबादत) की थी।
मोहर्रम की रस्में जारी
पिछले शनिवार से मोहर्रम की रस्में जारी है। हजरत इमाम हुसैन (hazrat imam husain) की चौकी धुलाई की रस्म अदा की गई। दरगाह क्षेत्र में बयान-ए- शहादत और मर्सियाख्वानी का दौर जारी है। चौकी के खिदमतगुजार हाजी मोहम्मद शब्बीर के अनुसार चौकी शरीफ (chowky sharif) को इमामगाह लंगरखाना से झालरे तक ले जाया गया था। लंगरखाना में चौकी पर गरीब नवाज के मजार शरीफ का गिलाफ रखा गया। चांदी के ताजिए शरीफ (tazia sharif) की जियारत भी कराई गई।
तलवारों से खेलेंगे हाईदौस
मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को दरगाह क्षेत्र स्थित अंदरकोट में तलवारों से हाईदौस (hidaus) खेलने की परम्परा है। हाईदौस अजमेर के अलावा पाकिस्तान (pakistan) के लाहौर में खेला जाता है। इसके लिए दी पंचायत अंदरकोटियान को जिला प्रशासन (dsitric administration) से इजाजत लेनी पड़ती है।
जायरीन की रौनक
मोहर्रम पर जायरीन (pilgrims) की आवक से दरगाह क्षेत्र में रौनक बनी हुई है। यूपी, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से जायरीन यहां पहुंचे हैं। यह रौनक मोहर्रम तक बनी रहेगी। यह ख्वाजा साहब (khwaza garib nawaz) का मिनी उर्स भी माना जाता है। सालाना उर्स में नहीं आने वाले जायरीन मिनी उर्स में हाजिरी देने पहुंचते हैं। इनके लिए कायड़ विश्राम स्थली में ठहराने के लिए खास इंतजाम भी किए गए हैं।