
Suspicious Death Of Man In Ajmer: अजमेर के जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में उस समय असमंजस की स्थिति बन गई जब मशीनिया निवासी मुकेश सिंह रावत के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम शुरू होने से पहले परिजन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। विरोध इतना बढ़ा कि ऑनलाइन पंजीकरण के बावजूद मेडिकल बोर्ड को प्रक्रिया रोकनी पड़ी और शव को दोबारा डी-फ्रीजर में रखवाया गया। पीसांगन के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक ने आंखों के पास चोट और गले पर निशान देखकर प्रथमदृष्टया मामला हत्या का मानते हुए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के लिए शव जेएलएन अस्पताल अजमेर रेफर कर दिया। हालांकि मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के लिए शव को रेफर नहीं किया जा सकता है लेकिन चिकित्सक के इनकार के बाद अनुसंधान अधिकारी शव को एम्बुलेंस में लेकर अजमेर पहुंच गए।
जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में शाम 5 बजे पहले से एक अन्य मामले में विवाहिता का मेडिकल बोर्ड पोस्टमार्टम चल रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुरोध पर मुकेश के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मेडिकल बोर्ड चेयरमैन डॉ. विश्वदीपक बीजावत व रेजिडेंट डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कर दिया लेकिन तभी परिजन ने नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग रख दी। इधर शव को फिर से डी-फ्रीजर में रखवा दिया गया।
मोर्चरी में काफी देर तक पुलिस और परिजन के बीच समझाइश का दौर चलता रहा। काफी समय बीतने के बाद पुलिस ने परिजन को बताया कि मृतक की पत्नी और एक संदिग्ध गोपाल सिंह से पूछताछ की जा रही है लेकिन परिजन तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। इसी बीच सूर्यास्त का समय हो गया। मेडिकल बोर्ड ने नियमों का हवाला देते हुए विशेष परिस्थिति में जिला कलक्टर की अनुमति की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए आखिरकार मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। पुलिस आज परिजनों को समझाकर पोस्टमार्टम करवाएगी।
सामान्य प्रक्रिया के अनुसार संदिग्ध मृत्यु के मामले में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के लिए शव को अनिवार्य रूप से हायर सेंटर भेजने की आवश्यकता नहीं होती। संबंधित सीएचसी या पीएचसी प्रभारी की सूचना पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्थानीय स्तर पर ही नजदीकी सरकारी अस्पतालों से चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करवा सकते हैं। इसके बावजूद जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अक्सर चिकित्सक मेडिकल-लीगल मामलों की जिम्मेदारी से बचने के लिए शव सीधे जेएलएन अस्पताल रेफर कर देते हैं। इससे न केवल परिजन परेशान होते हैं बल्कि पोस्टमार्टम में देरी का कारण भी बनता हैं। गुरुवार को भी पीसांगन सीएचसी के चिकित्सक ने यही प्रक्रिया अपनाई।
सुबह 6 बजे भाई मुकेश की मृत्यु हो गई। घटनास्थल पर पहुंचा तो हालात संदिग्ध नजर आए। मुझे मुकेश की पत्नी और ताऊ के बेटे गोपाल सिंह पर हत्या का संदेह है। बीते दो दिन से लगातार मुकेश से उसकी पत्नी झगड़ा कर रही थी। मुकेश के 5 छोटे बच्चे हैं। उन्हें न्याय दिलवाना चाहता हूं।
रमेश सिंह रावत, मृतक का भाई
घटनास्थल का निरीक्षण करने गई थी। इधर पीसांगन सीएचसी के चिकित्सक ने अनुसंधान अधिकारी को प्रथमदृष्ट्या मामला हत्या का बताकर शव को अजमेर रेफर कर दिया। अब शुक्रवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।
पारूल यादव, थानाप्रभारी, पीसांगन