
यूं मिला था अजमेर से अंग्रेजों को व्यापार का फरमान, देखिए जहांगीर और सर टॉमस रो को
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
यहां आपको सम्राट पृथ्वीराज चौहान और चन्दवरदायी बतियाते से नजर आएंगे तो मुगल बादशाह अकबर और राजा मानसिंह हल्दीघाटी के युद्ध की योजना बनाते और बादशाह जहांगीर से भारत में व्यापार की अनुमति मांगता सर टॉमस रॉ भी दिखेगा। कुछ ऐसे ही कलेवर के साथ राजकीय संग्रहालय दर्शकों और पर्यटकों के लिए वापस खुल गया। कला एवं संस्कृति राज्यमंत्री कृष्णेंद्र कौर दीपा ने जीर्णोद्धार के बाद संग्रहालय का शुभारम्भ किया। यहां सदियों पुराने अस्त्र-शस्त्र और पृथ्वीराज रासो की पेंटिंग सहित पुरामहत्व की अन्य सामग्री प्रदर्शित की गई है।
राजकीय संग्रहालय में अत्याधुनिक तरीके से आठ दीर्घाएं बनाई गई हैं। यहां सिंधु घाटी की सभ्यता और मोहनजोदड़ो में मिले सिक्के और वस्तुएं, विभिन्न क्षेत्रों से उत्खनन में मिली जैन और हिंदू देवी-देवताओं की पाषाण प्रतिमाएं, पृथ्वीराज रासो की पेंटिंग प्रदर्शित की गई हैं। इसके अलावा विभिन्न कालखंड में इस्तेमाल किए जाने वाली तलवार-भाले, ढाल, बंदूक, खुकरी, तोप और अन्य अस्त्र-शस्त्र भी आकर्षक ढंग से सजाए गए हैं।
संग्रहालय में सरवाड़ अैार अन्य इलाकों से मिली तोपों को भी लगाया गया है। सभी दीर्घाओं में आकर्षक लाइट, सामग्री से जुड़ी जानकारी, बैठने के लिए स्थान और साउंड सिस्टम भी लगाया गया है। इसके अलावा पूर्व में संचालित लाइट एन्ड साउंड शो भी पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
आठ सौ साल बाद आए हमारे पृथ्वीराज
सम्राट पृथ्वीराज चौहान और चन्दवरदायी की मूर्ति देखकर धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत अभिभूत हो गए। उन्होंने मंत्री कृष्णेंद्र कौर से कहा हमारे पृथ्वीराज 800 साल बाद वापस लौटे हैं। यह शहरवासियों और मेरे लिए गौरवशाली क्षण है। उन्होंने पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को पृथ्वीराज चौहान की आकर्षक प्रतिमा बनाने के लिए धन्यवाद दिया। इस दौरान शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल, विभाग के निदेशक हृदयेश कुमार शर्मा, वृत्त अधीक्षक नीरज कुमार त्रिपाठी, महापौर धर्मेन्द्र गहलोत, पार्षद नीरज जैन और अन्य मौजूद रहे।