
अजमेर.
शहरवासी और पर्यटक सौ फीट ऊंचाई पर ‘तिरंगा ’ फहराता नहीं देख सकते हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में सौ फीट की ऊंचाई पर नियमित राष्ट्रीय ध्वज फहराने की प्रक्रिया लम्बे अर्से से ठप है।
राज्यपाल कल्याण सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों में सौ फीट ऊंचाई पर तिरंगा लगाने के निर्देश दिए हैं। राज्य में बीकानेर, जयपुर और अन्य स्थानों पर इसकी शुरूआत हो चुकी है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में भी पिछले साल सौ फीट की ऊंचाई पर तिरंगा लगाया गया।
तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने इसका शुभारंभ किया। दिसम्बर में ओखी तूफान, फरवरी में मौसम खराब होने के चलते विश्वविद्यालय ने तिरंगा उतार दिया। इसके बाद यह तर्क दिया गया कि खराब मौसम और तेज हवा में तिरंगा फटता है।
यूं फहराया जाना है तिरंगा
तिरंगे की लम्बाई करीब 30 फीट और चौड़ाई 20 फीट है। यह शत-प्रतिशत पॉलिस्टर के कपड़े से निर्मित है। इसको फहराने के लिए खम्भे पर अत्याधुनिक लिफ्ट भी लगाई गई है। इसके बाद भी ध्वज नियमित नहीं फहराया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने बीती 15 अगस्त को ध्वज फहराया। इसके बाद ढाई महीने से सिर्फ सौ फीट खम्भा ही दिखता है।
आन-बान शान है तिरंगा
तिरंगा देश की आन-बान और शान है। इसको लहराता देख देशवासियों के मन में राष्ट्रीयता की भावना हिलोरें मारनी लगती है। चाहे क्रिकेट मैच हो या युद्ध का मैदान...तिरंगा सदैव आसमान में लहराता रहा है। स्वाधीनता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य समारोह में तिरंगा लहराते ही गर्व की अनुभूति होती है।
स्वामी विवेकानंद का प्रतिमा भी नहीं
विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा भी लगाई जानी है। अष्टधातु से बनने वाली प्रतिमा के लिए केंद्रीय पुस्तकालय के समक्ष, कुलपति निवास अथवा अन्यत्र स्थान चिन्हित किया गया है। करीब 6 फीट ऊंची और 14 फीट के प्लेटफार्म पर लगने वाली मूर्ति का भी अता-पता नहीं है।