
राजस्थान के अजमेर शहर में नीट (NEET) री-एग्जामिनेशन के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक व पारंपरिक पोशाक को लेकर हो गया। दरअसल, परीक्षा देने पहुंची एक छात्रा के बुर्के और हिजाब को लेकर सुरक्षाकर्मियों और परिजनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस घटनाक्रम की वजह से कुछ समय के लिए केंद्र के बाहर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और हंगामा खड़ा हो गया। हालांकि, यह पूरा मामला नियमों की सही जानकारी न होने और शुरुआती गलतफहमी के कारण बढ़ा, जिसे बाद में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की आधिकारिक गाइडलाइंस के तहत पूरी तरह सुलझा लिया गया। जांच के बाद छात्रा को समय रहते परीक्षा में बैठने का अवसर मिल गया।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ब्यावर क्षेत्र की रहने वाली छात्रा उम्मे कुलसूम अपने परिजनों के साथ अजमेर में निर्धारित किए गए नीट री-एग्जाम के परीक्षा केंद्र पर पहुंची। छात्रा ने अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बुर्का और हिजाब पहन रखा था। जैसे ही वह मुख्य प्रवेश द्वार पर कतार में खड़ी हुई, वहां सुरक्षा में तैनात निजी गार्ड्स और चेकिंग स्टाफ ने उसे रोक लिया।
सुरक्षाकर्मियों का तर्क था कि किसी भी तरह के ढीले कपड़े, बुर्के या हिजाब में सीधे प्रवेश नहीं दिया जा सकता। उन्होंने छात्रा के सामने शर्त रखी कि परीक्षा कक्ष के भीतर जाने के लिए उसे पहले अपना बुर्का पूरी तरह से हटाना होगा। सुरक्षाकर्मियों की इस शर्त को सुनते ही छात्रा और उसके साथ आए परिजन भड़क गए और उन्होंने धार्मिक आस्था व नियमों का हवाला देकर इस पर सख्त आपत्ति जताई, जिसके कारण मुख्य गेट पर अन्य परीक्षार्थियों की कतारें भी प्रभावित होने लगीं।
परीक्षा केंद्र के बाहर मचे हंगामे के बीच छात्रा उम्मे कुलसूम ने वहां मौजूद स्थानीय मीडिया और प्रशासनिक अमले के सामने अपना पक्ष मजबूती और तथ्यात्मक तरीके से रखा। उसने एनटीए के सूचना बुलेटिन का हवाला देते हुए बताया कि वह किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं कर रही है।
छात्रा उम्मे कुलसूम ने अपने बयान में कहा, ''एनटीए के नियम 18 में यह बहुत स्पष्ट अक्षरों में लिखा गया है कि देश के अभ्यर्थी अपनी धार्मिक और पारंपरिक पोशाक में परीक्षा देने आ सकते हैं। मैंने 3 मई को आयोजित हुई मुख्य नीट परीक्षा के दौरान भी यही पारंपरिक पोशाक पहनी थी और तब मुझे किसी भी केंद्र पर नहीं रोका गया था। हमने यहां तैनात महिला सुरक्षा स्टाफ से यह भी अनुरोध किया कि वे हमें एक तरफ ले जाकर पर्दे के पीछे हमारी पूरी और गहन चेकिंग कर लें, लेकिन उन्होंने शुरुआत में साफ मना कर दिया। जब एनटीए ने नियमों में हमें अनुमति दी है, तो परीक्षा केंद्र के ये स्थानीय सुरक्षाकर्मी हमें इस तरह प्रताड़ित नहीं कर सकते।"
जैसे-जैसे परीक्षा शुरू होने का समय नजदीक आ रहा था, केंद्र के बाहर तनाव और ज्यादा बढ़ने लगा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां तैनात केंद्र अधीक्षक और स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षाकर्मियों को एनटीए की 'कस्टमरी ड्रेस' नियमावली के बारे में विस्तार से समझाया।
इसके बाद एनटीए के मूल दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए महिला सुरक्षाकर्मियों की एक टीम को बुलाया गया। छात्रा उम्मे कुलसूम को एक अलग प्राइवेसी केबिन में ले जाया गया, जहां उसकी गरिमा का पूरा ध्यान रखते हुए पूरी तरह से गहन मैनुअल जांच की गई। यह सुनिश्चित करने के बाद कि बुर्के और हिजाब के भीतर किसी भी प्रकार की कोई प्रतिबंधित सामग्री, ब्लूटूथ डिवाइस या नकल की पर्चियां नहीं छिपाई गई हैं, छात्रा को उसी पोशाक के साथ परीक्षा कक्ष में जाने की अनुमति दे दी गई। इसके बाद ही परीक्षा केंद्र के बाहर का माहौल शांत हो सका।
अजमेर में हुए इस पूरे विवाद के बाद देश भर के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के बीच नीट परीक्षा के ड्रेस कोड को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी आधिकारिक नियमावली में बहुत साफ किया है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी भी अभ्यर्थी को उसकी धार्मिक मान्यताओं के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। एनटीए के अनुसार हिजाब, बुर्का, सिख समुदाय की पगड़ी या कड़ा और कृपाण जैसी चीजों को पारंपरिक पोशाक की श्रेणी में रखा गया है और इन्हें पहनने की पूरी छूट है, लेकिन इसके लिए कड़े तकनीकी और प्रशासनिक नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना हर अभ्यर्थी के लिए अनिवार्य है।
एनटीए की गाइडलाइंस के मुताबिक, जो भी अभ्यर्थी नीट परीक्षा के दौरान अपनी किसी पारंपरिक या धार्मिक पोशाक में केंद्र पर आने का फैसला करते हैं, उनके लिए समय का पाबंद होना सबसे ज्यादा जरूरी है। ऐसे अभ्यर्थियों को सामान्य रिपोर्टिंग समय से कम से कम 1 से 1.5 घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है।
समय सीमा: यदि सामान्य छात्रों के लिए गेट बंद होने का समय दोपहर 01:30 बजे है, तो पारंपरिक पोशाक वाले छात्रों को हर हाल में दोपहर 12:30 बजे तक या उससे भी पहले केंद्र पर पहुंचना आवश्यक है।
वजह: ऐसा इसलिए अनिवार्य किया गया है ताकि सुरक्षाकर्मियों को ऐसे विशेष कपड़ों की जांच करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके और चेकिंग की लंबी प्रक्रिया के कारण किसी भी अभ्यर्थी की मुख्य परीक्षा न छूटे। अजमेर मामले में भी समय रहते पहुंचने के कारण ही छात्रा की चेकिंग समय पर पूरी हो सकी।
नीट परीक्षा में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे माइक्रो ब्लूटूथ इयरपीस, सिम कार्ड चिप्स, स्पाई कैमरे) के जरिए होने वाली हाई-टेक नकल को रोकने के लिए एनटीए बेहद सतर्क रहता है। यही कारण है कि पारंपरिक ढीली पोशाकों की मेटल डिटेक्टर और मैनुअल तरीके से बारीकी से जांच की जाती है।
इस जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी महिला अभ्यर्थी को असहजता न हो, इसके लिए एनटीए ने कड़े निर्देश दिए हैं कि यह पूरी चेकिंग अनिवार्य रूप से केवल महिला सुरक्षा अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। साथ ही, यह पूरी प्रक्रिया मुख्य द्वार पर सबके सामने होने के बजाय एक पूरी तरह से बंद कमरे या स्क्रीन (पर्दे) के पीछे की जाएगी, ताकि अभ्यर्थी की निजता और गरिमा पूरी तरह अक्षुण्ण रहे।
हिजाब या बुर्का पहनने वाले अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी नियम यह है कि वे अपनी पोशाक को व्यवस्थित करने के लिए किसी भी तरह की धातु से बनी वस्तु का उपयोग नहीं कर सकते।
क्या है प्रतिबंधित: लोहे या स्टील से बनी सेफ्टी पिन, मैटेलिक हेयर क्लिप्स, फैशनेबल ब्रोच, या धातु के बड़े और भारी बटन पूरी तरह से वर्जित हैं।
विकल्प क्या है: यदि हिजाब या स्कार्फ को बांधना जरूरी हो, तो अभ्यर्थी को केवल साधारण सूती धागे, कपड़े की सिलाई या बिना मेटल वाली साधारण रबर बैंड का ही इस्तेमाल करना चाहिए। मेटल डिटेक्टर में किसी भी तरह की बीप की आवाज आने पर सुरक्षाकर्मी उसे हटवाने के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं।
एनटीए के नियमों के अनुसार, अभ्यर्थियों को नीट का ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते समय ही एक विकल्प दिया जाता है, जहां उनसे पूछा जाता है कि क्या वे परीक्षा के दिन किसी विशिष्ट पारंपरिक पोशाक में उपस्थित होना चाहते हैं? छात्रों को वहां 'YES' का विकल्प चुनना होता है।
हालांकि, यदि कोई अभ्यर्थी अनजाने में फॉर्म भरते समय इस विकल्प को चुनना भूल भी जाता है, तो भी एनटीए के पास मानवीय आधार पर एक विशेष बैकअप प्लान मौजूद है। ऐसी स्थिति में भी छात्र को परीक्षा से रोका नहीं जा सकता, बशर्ते वह परीक्षा के दिन दोपहर 12:30 बजे से पहले केंद्र पर पहुंच जाए और सुरक्षा स्टाफ को अपनी पूरी और गहन चेकिंग करने की स्वैच्छिक अनुमति दे दे।