
मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर).
नगर के पावरलूम उद्यमियों की वर्तमान में परेशानी बढ़ गई है। कपड़े की मांग कम होने के कारण स्टॉक बढ़ गया है और मांग बहुत कम रह गई है। इससे उद्यमियों को कपड़े का उत्पादन घटाना पड़ रहा है। अधिकतर फैक्ट्रियों में संचालन की शिफ्ट घटा दी गई है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो अगले माह से कई फैक्ट्रियां बंद भी हो सकती हैं।
नगर और आस-पास की पावरलूम फैक्ट्रियों में कपड़े का स्टॉक बढ़ता ही जा रहा है। यहां से तैयार अधिकतर कपड़ा जयपुर जाता है, लेकिन वहां मांग नहीं होने के कारण कपड़े की कीमत में कमी आ गई है। बैडशीट का कपड़ा जो पहले ४४ रुपए मीटर था वह अब ४२.५० पैसे मीटर हो गया है।
वहीं सूती धागे में तेजी-मंदी से भी परेशानी उठानी पड़ती है। बीस नंबर का सूती धागा जो पहले ६०० रुपए प्रति पांच किलो था वह बीच में ६१० और अब ५७५ हो गया है। इस उतार-चढ़ाव से भी उद्यमियों को परेशानी होती है।
मांग न्यूनतम होने से लगभग सौ से अधिक फैक्ट्रियों में कपड़े का स्टॉक अधिक हो गया है। बिजली की दरें अधिक होने के कारण पावरलूम उद्योग को पहले ही अधिक प्रतिस्पद्र्धा झेलनी पड़ रही है।
पीक सीजन में यह हाल
पावरलूम क्षेत्र के लिए मार्च से लेकर जून तक का समय पीक सीजन माना जाता है। इस पीक सीजन को कपड़ा छपने के अनुकूल माना जाता है। गर्मी होने और बरसात से पहले होने के कारण कपड़ा छपने और सूखने में आसानी रहती है।
इसलिए जयपुर कपड़ा मंडी में कपड़े की मांग रहती है, लेकिन वर्तमान में मांग घट गई है और नाममात्र की रह गई है। जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला पीक सीजन है, जब कपड़े की मांग नाममात्र की रह गई है।
नकदी कारोबार बंद होने का असर
किशनगढ़ के कपड़े से तैयार होने वाली बैडशीट फेरीवालों के माध्यम से घर-घर तक बेची जाती है। फेरीवालों के माध्यम से इसकी राशि दुकानदारों और दुकानदारों से व्यापारियों तक आती है।
यह कारोबार अधिकतर नकदी में रहता है। वर्तमान में चुनाव आचार संहिता के चलते नकदी के प्रवाह पर अंकुश लगा हुआ है। इसका असर पावरलूम उद्योग पर पड़ा है।
मजदूरों का भी नुकसान
इससे मजदूरों का भी नुकसान हुआ है। वर्तमान में अधिकतर छोटी पावरलूम फैक्ट्रियों में उत्पादन की एक शिफ्ट बंद की जा चुकी है। इससे मजदूरों की आय में कमी आई है। अधिकतर मजदूरों को उत्पादन के आधार पर भुगतान मिलता है। अगर शिफ्टों में और कमी आई या फैक्ट्रियां बंद हुईं तो मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे।
बंद हो सकती हैं फैक्ट्रियां
कपड़े का स्टॉक बढऩे से उत्पादन करने का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब कई फैक्ट्री संचालक अगले माह से अपनी फैक्ट्रियां बंद कर सकते हैं। नोटबंदी के बाद पहली बार ऐसा होगा कि पीक सीजन में कई फैक्ट्रियां बंद नजर आएं। इससे नगर की अर्थव्यवस्था का नुकसान होगा।
पावरलूम में तैयार कपड़े की मांग कम होने से स्टॉक काफी अधिक बढ़ गया है। अब तैयार कपड़े की खपत नहीं हो रही है।
- अरविंद गर्ग
वर्तमान में मांग कम उत्पादन अधिक होने से समस्या बढ़ गई है। पावरलूम उद्योग की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
- निर्मेश अग्रवाल