अजमेर

Pushkar Fair 2026: पुष्कर मेले में पहली बार होगी हॉर्स रेस, धोरों में दौड़ेंगे देसी नस्ल के घोड़े

Pushkar Fair Horse Race: अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में इस बार रेतीले धोरों पर घोड़े हवा में बातें करते नजर आएंगे। मेले में पहली बार हॉर्स रेस ( एंड्यूरेंस राइड) प्रतियोगिता होगी।
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Updated: 8 Nov 2026, 1:05 PM IST
Pushkar Mela News
पुष्कर के धोरों में घुड़सवारी करते घुड़सवार। पत्रिका फाइल फोटो 

मोहम्मद वाहिद पठान

अजमेर। अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में इस बार रेतीले धोरों पर घोड़े हवा में बातें करते नजर आएंगे। मेले में पहली बार हॉर्स रेस ( एंड्यूरेंस राइड) प्रतियोगिता होगी। मारवाड़ी, काठियावाड़ी और सिंधी नस्ल के घोड़े सरपट दौड़ेंगे। इसमें कामयाबी मिलने पर पशुपालन विभाग अंतरराष्ट्रीय स्तर की हॉर्स राइडिंग प्रतियोगिता का आयोजन कराएगा। पुष्कर पशु मेला अमूमन ऊंटों, घोड़ों और बकरी और अन्य पशुओं की खरीद-फरोख्त तक ही पहचाना जाता रहा है। पशुपालन विभाग ने पर्यटकों के आकर्षण और देशी नस्ल को बढ़ावा देने के लिए इस बार नवाचार का फैसला किया है।

पशुपालन विभाग और राजस्थान घुड़सवारी संघ इस प्रतियोगिता का आयोजन करेगा। इसमें सिर्फ मारवाड़ी, काठियावाड़ी और सिंधी-कच्छी नस्ल के घोड़े शामिल होंगे। तीनों नस्ल के घोड़ों की खूबी और क्षमता जांची जाएगी। प्रतियोगिता से पहले घोड़ों का स्वास्थ परीक्षण किया जाएगा।पहली रेस 30 किलोमीटर और दूसरी 60 किलोमीटर की होगी। प्रतियोगिता से पूर्व पशुपालन विभाग घोड़ों के स्वास्थ और खान-पान का पूरा ध्यान रखेगा। रेस में घुड़सवार टीम अथवा व्यक्तिगत भी शामिल हो सकेंगे। एक टीम में 5 सदस्य होंगे। व्यक्तिगत घुड़सवारों की 50 व्यक्तियों की राइड होगी। चिन्हित छह प्रतिभागियों को नेशनल के लिए क्वालीफाई किया जाएगा

पुष्कर पशु मेले में धोरों के बीच करतब दिखाता घोडा। पत्रिका फाइल फोटो 

यह होगा रूट

मोतीसर रोड स्थित चारागाह भूमि से रेस शुरु होगी। हेलीपेड पर घोड़ों की जांच होगी। यह आरामबाग, धोरों के पीछे रिसॉर्ट, सवाईपुरा गांव के श्मशान के पास से पिचोलिया गांव- वन भूमि से होते हुए अरावली पर्वत तक राउंड करेंगे। 30 किमी रेस में 15 किमी का ट्रेक रखा गया है। इसके दो राउंड किए जाएंगे। 60 किमी रेस में 15 किमी ट्रेक के चार राउंड किए जाएंगे। 1 घंटे में घोड़े को 15 किलोमीटर ही दौड़ना होगा। इससे ज्यादा दौड़ाने पर उसे 5 साल के लिए प्रतियोगिता से बाहर किया जाएगा।

यह है अश्वों की खासियत

मारवाड़ी नस्ल: अंदर की ओर मुड़े धनुषाकार कान, तेज गति और मजबूत कद-काठी इन्हें विशेष बनाते हैं। रेगिस्तानी इलाकों में बिना थके लंबी दूरी तय करते हैं। रेवाल चाल इनकी सबसे बड़ी खासियत है।

काठियावाड़ी नस्ल: राजकोट, जूनागढ़, अमरेली क्षेत्र और राजस्थान-महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में पाए जाते हैं। मुड़े कान , मजबूत बनावट , शानदार 'रेवाल' चाल इनकी विशेषताहै। यह भी बिना थके दौड़ते हैं।

कच्छी-सिंधी नस्ल: कच्छ सहित बाड़मेर व जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में पाए जाते हैं। सूखे और रेतीले क्षेत्रों में कम पानी व भोजन में रह सकते हैं। कद-काठी, रोमन नाक और तेज रफ्तार इनकी विशेषता है।

अश्वपालकों को फायदा

-घोड़ों का प्रदर्शन दिखाने-देखने का अवसर
-मेले में देसी नस्ल की मिलेगी जानकारी
-अश्वों की खरीद-फरोख्त में होगा फायदा
-ग्रामीण इलाकों के अश्व पालकों को मिलेगी पहचान

इनका कहना है

मेले में पहली बार पुष्कर एंड्यूरेंस राइड होगी। किसानों-अश्वपालकों को अच्छा प्लेटफॉर्म मिलेगा। प्रतियोगिता के माध्यम से रोजगार भी उपल्बध होगा। प्रशासनिक अनुमति मिल चुकी है। रुट भी तय किया गया है।
-डॉ नवीन परिहार, अतिरिक्त निदेशक पशुपालन विभाग अजमेर