
अजमेर। नौकरी और पढ़ाई के लिए युवाओं के कदम विदेश में बढ़ रहे हैं। पांच साल में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है । खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, चीन, यूएई पढ़ाई व रोजगार के लिए पसंदीदा बन चुके हैं । 2015-16 तक पढ़ाई, कॅरिअर और नौकरी के लिए विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या 10 से 12 प्रतिशत तक सीमित थी । महज दस साल में तस्वीर काफी बदल चुकी है । अब यह आंकड़ा बढ़कर 28 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ज्यादातर का लक्ष्य विदेश के कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पढ़ाई, ट्रेवल और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ा है ।
राजस्थान के महानगराें और बड़े शहरों के अलावा अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, केकड़ी, पुष्कर, नसीराबाद, भीलवाड़ा, नागौर, डीडवाना-कुचामन और अन्य शहरों के युवा विदेश जा रहे हैं । इनकी संख्या 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है । कई युवा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, चीन, यूएई और अन्य देशों में पढ़ाई और नौकरी के लिए पहुंच रहे हैं । आगामी दस साल में यह संख्या 35 प्रतिशत से ज्यादा पहुंचेगी ।
ब्रिटेन में जनवरी 2027 से पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढने की अवधि 2 साल से घटाकर 18 महीने होगी । अमरीका में पहले भारतीय आवेदक पड़ोसी देशों में स्थित अमरीकी दूतावासों में बी1/बी2 (व्यावसायिक और पर्यटक) वीजा के लिए साक्षात्कार बुक कर सकते थे। अब सुविधा समाप्त कर दी गई है ।
नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, इटली, फिलीपीन्स, हांगकांग, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन आदि देश पढ़ाई, रोजगार के लिए पसंदीदा बन चुके हैं। आसान वीजा नियमों, पढ़ाई - रोजगार और कम फीस सहित अन्य सहूलियत के चलते लोगों का रुझान बढ़ रहा है ।
अक्षिता ( बदला हुआ नाम ) ने वेलिंगटन में बॉटनी में रिसर्च के लिए प्रवेश लिया है । वह रिसर्च के साथ विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में क्लास भी ले रही हैं। कॅरिअर में इसका फायदा होगा ।
अर्पित (बदला हुआ नाम) ने जर्मनी में एमबीए के लिए प्रवेश लिया । डिग्री पूरी करने के बाद स्टुटगार्ट में सिंथेवो में नौकरी कर रहे हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में रिसर्च और स्पेशल कोर्स के साथ नौकरी के चलते युवाओं का रुख विदेश की तरफ बढ़ रहा है । औसतन यह आंकड़ा 28 प्रतिशत तक पहुंच गया है । बेहतर अवसर, कॅरिअर में फायदा और त्वरित ग्रोथ इसकी सबसे बड़ी वजह है । देश में आइआइटी-आइआइएम और अन्य संस्थानों से प्लेसमेंट लेकर भी युवा विदेश जाने को तवज्जो देने लगे हैं ।