अजमेर

Ajmer: री-नीट का फर्जी पेपर बेचने वाले 2 छात्र हरियाणा से गिरफ्तार, अब मोबाइल और बैंक खाते से खुलेंगे राज

fake Re-NEET Paper: री-नीट परीक्षा 2026 के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को झांसे में लेकर मोटी रकम ऐंठने वाले दो युवकों को जिला पुलिस ने हरियाणा करनाल से गिरफ्तार कर लिया।
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Jun 26, 2026
Re-NEET fake paper
पुलिस की गिरफ्त में दोनों आरोपी। फोटो: पत्रिका

अजमेर। री-नीट परीक्षा 2026 के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को झांसे में लेकर मोटी रकम ऐंठने वाले दो युवकों को जिला पुलिस ने हरियाणा करनाल से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी बी.टेक इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। आरोपियों ने सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर परीक्षा के फर्जी प्रश्न पत्र दिखाकर 30 हजार रुपए की मांग की थी। पेपर दिखाने के बाद आरोपी भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेज देते थे। वृत्ताधिकारी (साउथ) मनीष बड़गूजर ने बताया कि रामगंज थाना क्षेत्र में री-नीट परीक्षा 2026 के फर्जी पेपर के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया।

दयानंद महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह ने इस संबंध में शिकायत दी। पुलिस शिकायतकर्ता की ओर से दिए गए मोबाइल नंबरों की लोकेशन और डिजिटल गतिविधि की पड़ताल करते हुए हरियाणा करनाल पहुंची। यहां से दो संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अनुसंधान में उन्होंने फर्जी पेपर तैयार कर छात्रों से पैसे ऐंठने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने बिहार मधुबनी हाल हरियाणा करनाल निवासी आकाश कुमार (19) और उत्तर प्रदेश कासगंज निवासी अश्वनी कुमार (19) को गिरफ्तार कर लिया। दोनों करनाल में इंजीनियरिंग में बी. टेक प्रथम वर्ष की परीक्षा दे चुके हैं। कार्रवाई में अलवर गेट थानाप्रभारी नरेन्द्रसिंह जाखड़, रामगंज थाने के एएसआई सुरेन्द्र सिंह व सिपाही मूलाराम ने विशेष योगदान दिया।

यों बनाते थे ठगी शिकार

पुलिस पड़ताल में आया कि आरोपी आकाश ने अपने कॉलेज का खर्च निकालने के लिए मई में नीट परीक्षा पेपर आउट होने का फायदा उठाते हुए री-नीट परीक्षा का एआई से फर्जी प्रश्न पत्र तैयार किया। फिर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फर्जी आईडी बनाकर पेपर से जुड़ा वीडियो अपलोड कर दिया। इस पर कमेन्टस करने वालों को सम्पर्क साधते हुए अपना सोशल मीडिया नम्बर दे दिया। छात्र या अभिभावक सम्पर्क करते थे तो उन्हें वीडियोकॉल पर कथित प्रश्नपत्र दिखाकर 10 हजार से 30 हजार की मांग की जाती थी। भुगतान क्यूआर कोड के जरिए लेने के बाद फर्जी पेपर भेज दिया जाता था।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ा ठगी का जाल

सीओ बड़गूजर ने बताया कि प्रतियोगी व प्रवेश परीक्षाओं के दौरान साइबर ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर छात्रों की बेचैनी और सफलता की चाह का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। पुलिस आरोपियों से पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन्होंने कितने लोगों को शिकार बनाया और नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।

मोबाइल और बैंक खाते से खुलेंगे राज

बड़गूजर ने बताया कि पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट व बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। फर्जी पेपर तैयार करने और उसे प्रसारित करने के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।

काम नहीं आई होशियारी

पुलिस पड़ताल में आया कि दोनों छात्र मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई को आगे भी जारी रखने के लिए दोनों ने शॉर्टकट से पैसा कमाने का षड़यंत्र रचा। इसके लिए आकाश ने बाकायदा एआई से ट्रेनिंग ली। वीडियो एडिट, ग्राफिक्स बनाना सीखा। फिर पेपर नजदीक आते ही अपनी कारगुजारी अंजाम दे डाली। हालांकि उनकी होशियारी धरी रह गई। पुलिस ने अकाउंट नम्बर के आधार पर दोनों को दबोच लिया।

यह है मामला

दयानंद महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि गत 19 जून को कॉलेज की एक छात्रा ने उन्हें बताया कि अज्ञात व्यक्ति मोबाइल नंबर के जरिए सम्पर्क कर री-नीट का प्रश्नपत्र देने का दावा कर रहा है। आरोपी ने वीडियोकॉल पर कथित प्रश्नपत्र दिखाया और 30 हजार की मांग की। सूचना की पुष्टि के लिए सिंह ने मित्र के मोबाइल से आरोपी से संपर्क किया। इस दौरान आरोपी ने वीडियोकॉल पर पेपर दिखाया और भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेजा। पूरी बातचीत और लेनदेन का प्रस्ताव मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद 23 जून को रामगंज थाने में मामला दर्ज करवाया।

Published on:
26 Jun 2026 09:24 am