
Ajmer Weather News: अजमेर. शहर में शनिवार सुबह तेज हवाओं संग बरसात हुई। इससे सुबह मौसम में ठंडक रही। दिनभर बादल मंडराते रहे। धूप-छांव का दौर भी चला। अधिकतम तापमान 38.9 और न्यूनतम 20.0 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह 5 बजे तेज हवाओं और गर्जना से बरसात हुई। वैशाली नगर, माकड़वाली रोड, पंचशील, आनासागर लिंक रोड, पुष्कर रोड, शास्त्री नगर, चौरसियावास रोड, जयपुर रोड, आगरा गेट, स्टेशन रोड सहित विभिन्न इलाकों में नाले-नालियों में पानी बह गया। इसके बाद सुबह 7 बजे तक टपका-टपकी का दौर चला।
सड़कों पर कचरा-गंदगी
हवा से तिरपाल, लोहे के टीन, हल्के सामान उड़ गए। घरों में गमले गिर गए। कई जगह ग्रीन नेट फट गए। सड़कों पर मिट्टी-पत्थर, कचरा और गंदगी फैली रही। इससे लोगों को खासी परेशानी हुई।
बोरिंग से निकाल रहे पानी
बोरिंग से अंधाधुंध जल दोहन जारी है। कई बार जिला प्रशासन और पुलिस बोरिंग मशीन जब्त करते हैं। भूजल दोहन वाले क्षेत्र में लोगों को नोटिस भी नहीं जारी होते हैं। लेकिन जलदोहन की तुलना में कार्रवाई की रफ्तार कम है।
झील का प्राकृतिक वेटलैंड किया बर्बाद, नालों से पहुंच रहा गंदा पानी
शहर की शान कही जाने वाली आनासागर झील बढ़ते प्रदूषण-अतिक्रमण से पहचान खो रही है। झील का प्राकृतिक वेटलैंड बर्बाद हो चुका है। करीब 100 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद नालों का गंदा पानी झील में पहुंच रहा है। ईको टूरिज्म बढ़ाने और झील के संरक्षण के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं।
झील के पानी में ऑक्सीजन का लेवल बनाए रखने के लिए करीब आठ साल पूर्व फाउंटेन और एरिएटर लगाए थे।जिले की एक सीमेंट कम्पनी ने झील के लिए 30 एचपी मोटर का एक 30 फीट ऊंचा जेट फाउंटेन दान में दिया था, यह कुछ दिनों बाद बंद हो गया। एनएलसीपी परियोजना के तहत पानी की शुद्धता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिए चौपाटी परिसर में लगाए एरिएशन प्लांटऔर आरएसआरडीसी द्वारा बनाए गया 50 लाख रुपए का झरना भी बंद है।
झील का वेटलैंड किया बर्बाद
स्मार्ट सिटी के तहत 2020 में आनासागर झील किनारे सेवन वंडर्स पार्क बना गए। झील के प्राकृतिक वेटलैंड में हुए सेवन वंडर्स के अवैध निर्माण में नियम ताक में रख दिए गए। इससे वैशाली नगर-पुष्कर रोड, सागर विहार क्षेत्र में वेटलैंड खत्म हो गया। रही-सही कसर चारों तरफ बनाई चौपाटी ने पूरी कर दी। राजस्थान पत्रिका ने इसके खिलाफ अभियान चलाया। सिलसिलेवार प्रकाशित खबरों पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने संज्ञान लेकर सेवन वंडर्स को तोड़ा गया।
जलीय जैव विविधता पर खतरा
मदस विवि के पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रोतो दत्ता ने बतया कि झील का पानी प्रदूषित होने से जलीय जीव जंतुओं पर खतरा बना हुआ है। कई बार मछलियां मर चुकी हैं। यहां स्पॉटबिल डक, आईबिस, कॉमन मैना, परपल ग्रे हेरॉन,कॉमन टील, रफ, किंगफिशर और अन्य पक्षी दिखते हैं। करीब 30 साल से साइबेरियन क्रेन नहीं आ रहे हैं। अन्य प्रवासी पक्षियों की आवाजाही में भी कमी आई है।
दस साल में हुआ यह हाल
13 किलोमीटर (8.1 मील) क्षेत्र में फैलाव
-15 हजार से ज्यादा मकान बन गए चारों ओर
-39 व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिन्हें 2024 में किया सीज
-30 प्रतिशत तक प्रवासी पक्षियों की आवक कम
-10 से 20 प्रतिशत हिस्से में फैली हुई है जलुकंभी
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत-13 नालों से पहुंच रहा है झील में गंदा पानी
-200 से ज्यादा फास्ट फूड-ठेलों का कचरा-150 से ज्यादा छोटी नालियाें से पहुंच रहा सीवरेज
-20 प्रतिशत तक औद्योगिक अपशिष्ट-35 प्रतिशत प्लास्टिक की थैलियां-बोतल और अन्य सामान
यह प्रयास नहीं हुए कारगर-45 हजार कनेक्शन सीवरेज से जोड़े
-आनासागर में 13 एमएलडी, खानपुरा में 20 एमएलडी एसटीपी-550 किमी सीवरेज लाइन डाली शहर में
-140 किमी की लाइन, 7 एमएलडी का एसटीपी निर्माणाधीन
इतना गंदा है झील का पानी
टर्बिडिटी- 15.5 से 21.2 मिलीग्राम प्रति लीटर
1100 से 1200 प्रतिशत है पानी की चालकता280 से 350 तक है फेकल कॉलीफॉर्म
4.5 कण प्रति लीटर माइक्रो प्लास्टिक
(प्रदूषण मंडल के आंकड़े)
वेटलैंड का संरक्षण होने पर यहां ईको टूरिज्म बढ़ सकता है। पर्यावरणविद, शोधार्थी, विद्यार्थी झील का भ्रमण कर सकते हैं। देशी-प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण में मदद मिल सकती है।
प्रो. मनोज यादव, बॉटनी विभाग, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय