अजमेर

guest interview: बोले सिंघम ऑफ इंदौर, अगर बेटा कफन की बजाय तिरंगे में लिपट कर आए तो आंसू नहीं फक्र करेंगे मां बाप

प्रत्येक युवा का सपना होना चाहिए कि उसकी मौत आए तो सड़क पर नहीं देश की सीमा की सुरक्षा करते हुए।
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Updated: 9 Apr 2018, 8:33 AM IST
youth should be martyr on border as compare to died in road accident

अजमेर . 'सिंघम ऑफ इंदौर माने जाने वाले मध्यप्रदेश के वरिष्ठ ट्रैफिक कांस्टेबल कुंवर रंजीत सिंह अजमेर आए। उन्होंने कला अंकुर की ओर से पुलिस लाइन में आयोजित खाकी तुझे सलाम कार्यक्रम में शिरकत की। सिंह ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दोस्त राम-अनिल की सड़क दुर्घटना में मौत ने उसको हिलाकर रख दिया। सड़क दुर्घटना में अकाल मृत्यु के बाद समझ आया कि देश में सड़क दुर्घटना में मरने वालों में 40 फीसदी 25 से कम उम्र के युवा होते हैं।

सड़क दुर्घटना में हुई मौत परिवार और समाज पर बोझ बनकर रहती है। ऐसे तो देश का युवा सड़क पर दम तोड़ देगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा का सपना होना चाहिए कि उसकी मौत आए तो सड़क पर नहीं देश की सीमा की सुरक्षा करते हुए। शव कफन की बजाय तिरंगे में लिपट कर जाएगा तो माता-पिता की आंखों में आंसू की बजाय फख्र होगा। उन्होंने कहा कि देश-समाज को बचाना है तो स्कूली बच्चों को जागरूकता करने की जरूरत है। मैंने ट्रेफिक पॉइंट को लोगों को सुरक्षित यातायात के लिए जागरूक करने का स्थान बना लिया।


अब तक 53 अवार्ड

रंजीत सिंह ने बताया कि वह अब तक 105 स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम कर चुके हैं। इसके लिए उन्हें अब तक 53 अवार्ड मिल चुके है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की ओर से मध्यप्रदेश गौरव सम्मान दिया गया। उन्होंने युवाओं को देश से मोहब्बत की बात कही। उन्होंने कहा कि देश से मोहब्बत करने से ही उन्हें ताकत मिलती है।

युवा प्राथमिकताएं तय करे। आप अच्छा कर रहे है तो आपको डरने की जरूरत नहीं है।
हर जवान सिंघमरंजीत सिंह ने कहा कि पुलिस का हर जवान सिंघम है। सम्मान और मोहब्बत से सब कुछ बदला जा सकता है। पुलिस अफसर और जवानों अपने पुलिस अधिकारी की शाबासी मात्र से रिचार्ज हो जाते हैं। चौबीस घंटे की ड्यूटी करने के बाद वह फिर से तैनात हो जाता है।

पुष्कर से है 18 साल पुराना नाता
रंजीतसिंह ने जीवन का वृत्तांत सुनाते हुए कहा कि मां से किस्मत के संबंध में पूछा तो उन्होंने ब्रह्माजी द्वारा लिखना बताया। वह 18 साल पहले 8 अप्रेल को पुष्कर आया। जब लौटा तो मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती हो गया। उस दिन अपनी किस्मत पर यकीन हो गया। रंजीत बीते 18 साल से 8 अप्रेल को पुष्कर में ब्रह्माजी के दर्शन करते हैं।

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