नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) को लेकर चिकित्सकों ने धिक्कार दिवस मनाया।
अलीगढ़। नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) को लेकर चिकित्सकों ने धिक्कार दिवस मनाया। संसद में एनएमसी बिल पेश किए जाने का आईएमए व डॉक्टरों ने विरोध किया। इस बिल की निंदा करते हुए आईएमए के पदाधिकारियों ने कहा कि यह बिल देश वासियों के हित में नहीं है। इसके सभी तथ्य मेडिकल प्रोफेशनल एवं एजुकेशन के विरोध में हैं।
मेडिकल एजुकेशन महंगी हो जाएगी
चिकित्सकों का कहना है कि इस बिल के अनुसार प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों पर अंकुश समाप्त हो जाएगा और मेडिकल एजुकेशन महंगी हो जाएगी। रामघाट रोड स्थित मित्तल डायग्नोस्टिक सेंटर पर डॉक्टरों ने सभा कर सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल का विरोध किया। सभा में डॉक्टरों ने बताया कि इस बिल के अनुसार आयुष डॉक्टर ब्रिज कोर्स करने के उपरांत एलोपैथिक प्रैक्टिस करने के लिए सक्षम हो जाएंगे। आईएमए के डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट डॉ सुनील मित्तल ने बताया कि शहर और ग्रामीण इलाकों के रोगियों को दो भागों में बांट कर आयुष डॉक्टरों को ग्रामीण रोगियों के इलाज के लिए लाइसेंस दिया जा रहा है। वहीं मेडिकल विद्यार्थियों के एमबीबीएस पास करने के बाद एनईएक्सटी परीक्षा देने का विरोध कर रहे हैं।
सांसद को दिया ज्ञपान
आईएमए के आह्वान पर सभी क्लीनिक, ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, सर्जरी व सभी डायग्नोस्टिक सेंटर शाम को छह बजे तक पूर्णतया बंद रख कर विरोध किया गया। आईएमए के डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट सुनील मित्तल ने कहा, 2017 में केंद्र सरकार ने एनएमसी बिल पास किया था जिसमें बहुत सी बातें मरीजों और डॉक्टरों के खिलाफ हैं। इस बिल का पहले भी विरोध किया था, एक बार फिर सरकार संसद में बिल ला रही है, आईएमए के डॉक्टर एक बार फिर इसका विरोध कर रहे हैं। डॉ सुनील मित्तल ने बताया कि सरकार ऐसी प्रणाली लाने जा रही है कि आयुष डॉक्टर भी एक साल की ट्रेनिंग के बाद एलोपैथिक दवाएं दे सकते हैं इस बात का आईएमए विरोध कर रहा है। अपनी मांगों को लेकर आईएमए ने सांसद सतीश गौतम को ज्ञापन दिया है। वहीं सांसद सतीश गौतम ने कहा, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ आईएमए के डॉक्टरों की मीटिंग कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार जो डिसीजन ले रही है वह गरीबों के प्रति समर्पित है, अगर इसमें कुछ खामियां हैं तो उसको दूर करने का प्रयास किया जाएगा और जो अच्छा रहेगा उसको बिल में पेश किया जाएगा।