
Naib Subedar Gulveer Singh: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के अतरौली तहसील के छोटे से गांव सिरसा के रहने वाले नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐसा इतिहास रच दिया, जो अब तक कोई भारतीय नहीं कर सका था। उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई देकर जश्न मनाया।
गुलवीर सिंह भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 'द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट' में नायब सूबेदार (JCO) के पद पर तैनात हैं। सेना की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने एथलेटिक्स में भी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पिछले कुछ वर्षों में वह एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक रजत जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान मौसम खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं था। तेज बारिश और ठंड के बावजूद गुलवीर ने हिम्मत नहीं हारी। पूरी रेस में वह पदक की दौड़ में बने रहे और आखिरकार 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीत लिया।
गुलवीर सिंह लंबी दूरी की दौड़ में पहले भी कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। वर्ष 2025 में वह 5000 मीटर दौड़ 13 मिनट से कम समय में पूरी करने वाले पहले भारतीय धावक बने थे। अब 10,000 मीटर में कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत पदक जीतकर उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई है।
गुलवीर की पत्नी बबीता ने उनकी जीत पर खुशी जताते हुए कहा, "उन्होंने कल शानदार दौड़ लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया। हमारे जिले और पूरे देश का नाम रोशन किया है। घर में सभी लोग बहुत खुश हैं। गांव में जश्न जैसा माहौल है। हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है। हमें उन पर गर्व है कि उन्होंने भारत का मान बढ़ाया।"
गुलवीर की मां लक्ष्मी बेटे की सफलता से भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, "बचपन में गुलवीर खेतों में दौड़ा करता था। वहीं से उसकी मेहनत शुरू हुई और आज उसने देश का नाम रोशन कर दिया। मुझे अपने बेटे पर बहुत गर्व है। भगवान उसे हमेशा आगे बढ़ाए, ताकि वह भारत के लिए और भी बड़े मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाता रहे।"
गुलवीर सिंह के सिल्वर मेडल जीतने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे सिरसा में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी, एक-दूसरे को बधाई दी और इसे पूरे इलाके के लिए गर्व का पल बताया। परिवार के घर लगातार रिश्तेदारों, पड़ोसियों और शुभचिंतकों का आना-जाना लगा हुआ है।