
अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आंगबाड़ी वर्कर्स ने सोमवार को मिनी सचिवालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। सरकार की ओर से कोई सकारात्मक रुख या बातचीत की पहल न होने से नाराज कार्यकर्ताओं ने आज मिनी सचिवालय के सामने मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। कड़कड़ाती धूप और चिपचिपी उमस के बावजूद आस-पास के क्षेत्रों से भारी संख्या में आई महिलाएं सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगीं। इस गर्मी के कारण प्रदर्शन के दौरान कई महिला कार्यकर्ताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिन्हें मौके पर ही साथी वर्कर्स ने पानी और ओआरएस देकर संभाला।
आपको बता दें कि यह गतिरोध तब से शुरू हुआ है जब सरकार की बेरुखी से तंग आकर कार्यकर्ताओं ने पिछले सोमवार को ही जिलेभर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूरी तरह तालाबंदी कर दी थी। पिछले एक हफ्ते से केंद्रों पर ताला लटके होने की वजह से जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। छोटे और नौनिहाल बच्चों के पोषण आहार, रूटीन टीकाकरण (वैक्सीनेशन) और गर्भवती महिलाओं की देखरेख से जुड़े बेहद जरूरी और संवेदनशील सरकारी काम पूरी तरह ठप पड़े हैं। इससे आम जनता और गरीब परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सरकार उनसे काम तो स्थायी सरकारी कर्मचारियों जैसा चौबीसों घंटे लेती है, लेकिन दाम के नाम पर बेहद मामूली मानदेय दिया जाता है, जिससे घर चलाना भी मुश्किल है। कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में हर महीने मिलने वाले मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना, सेवा का नियमितीकरण करना, राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाना और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा के लिए पेंशन योजना लागू करना शामिल है।
आज के उग्र प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी इन जायज मांगों का जल्द समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और ज्यादा तेज किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा है कि हड़ताल की वजह से जनता को हो रही भारी परेशानी और विभागीय कामकाज के नुकसान की पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग और राज्य सरकार की होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस तालाबंदी को खुलवाने के लिए क्या कदम उठाता है।