
राजस्थान में अलवर के जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने वर्ष 2016 के बहुचर्चित अवतार सिंह हत्याकांड में एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह (पाटा) समेत कुल 9 मुख्य आरोपियों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सख्त सजा सुनाई है। इस मामले में कोर्ट ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। 10 साल से अधिक समय तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए अदालत के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अपराध करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता।
इस फैसले के बाद से ही कोर्ट परिसर के बाहर और पाटा गांव में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
न्यायाधीश हरेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता और अपराध की क्रूरता को देखते हुए दोषियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कानून की विभिन्न धाराओं के तहत सभी 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और प्रत्येक दोषी पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
उम्रकैद की सजा पाने वाले अपराधियों में बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह (पाटा), अनूप सिंह, कमलजीत सिंह, गुरवचन सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत सिंह, अमन सिंह, हरविंदर सिंह और विश्वेंद्र सिंह शामिल हैं।
सरकारी वकील और पीड़ित पक्ष की ओर से अदालत में इस जघन्य हत्याकांड को साबित करने के लिए बेहद मजबूत तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए थे।
न्यायालय ने यह सख्त फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए 22 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान, डॉक्टरों की विस्तृत मेडिकल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना स्थल से जुटाए गए पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सुनाया है।
बचाव पक्ष के वकीलों ने इंद्रजीत सिंह के राजनीतिक रसूख और पारिवारिक संबंधों का हवाला देकर राहत मांगने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
यह खूनी वारदात 10 जून 2016 की शाम करीब 6:30 बजे अलवर जिले के नौगावां थाना क्षेत्र के पाटा गांव में घटित हुई थी, जिसने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया था।
मृतक अवतार सिंह, मुख्य आरोपी और पूर्व भाजपा नेता इंद्रजीत सिंह का सगा भांजा था। पाटा गांव में हुए सरपंच चुनाव को लेकर दोनों परिवारों के बीच गहरा विवाद चल रहा था।
अवतार सिंह का परिवार जिस स्थानीय प्रत्याशी का समर्थन कर रहा था, वह चुनाव जीत गया था, जिसके बाद से आरोपी इंद्रजीत सिंह ने अपने ही भांजे से रंजिश पाल ली थी।
10 जून की शाम को आरोपियों ने पूरी प्लानिंग के साथ अवतार सिंह और उनके परिजनों को गांव के रास्ते में घेर लिया। आरोपियों ने उन पर हथौड़े, तलवार, चाकू, लोहे के पाइप, हॉकी और लाठियों से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला किया, जिससे अवतार सिंह लहूलुहान होकर वहीं गिर गए। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद नौगावां थाने में मर्डर का केस दर्ज हुआ था।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद मृतक अवतार सिंह के बेटे अजयपाल ने भावुक होते हुए मीडिया को बताया कि उनके परिवार को पूरे 10 साल और 18 दिन के लंबे व मानसिक तनाव से भरे इंतजार के बाद आज आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया। हालांकि, कोर्ट परिसर में एक बेहद अजीब और चौंकाने वाला दृश्य भी देखने को मिला।
सजा का एलान होने के बाद भी मुख्य आरोपी इंद्रजीत सिंह पाटा और अन्य दोषियों के चेहरों पर अपने किए का कोई पछतावा या शिकन नहीं दिखाई दी। जेल वैन में बैठते समय भी आरोपी पुलिस के सामने हंसते हुए और अपनी मूंछों पर ताव देते हुए नजर आए, जिसकी स्थानीय लोगों और कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों ने कड़ी निंदा की है।