
लिपिक भर्ती 2013 की राज्यस्तरीय जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकार ने 18 लिपिकों व प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं पर सीधे रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश जिला कलक्टर व जिला परिषद सीईओ को दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 70 पर दर्ज टिप्पणी में इन अभ्यर्थियों के शैक्षणिक व प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों के अलावा अनुभव प्रमाणपत्रों की अवधि में ओवरलैप मिलने का उल्लेख किया गया है। जिला परिषद सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार जिन 18 अभ्यर्थियों के प्रकरणों में यह विसंगति सामने आई है, उनमें अशोक कुमार बागड़ी, नाहर सिंह यादव, ओमप्रकाश जांगिड़, रोहिताश सैन, ओमप्रकाश सैनी, बाबूलाल स्वामी, शंभुदयाल जाट, राजेंद्र प्रकाश शर्मा, अवनीश दुबे, रामकरण गुर्जर, अनीता कुमारी सैनी, ज्योति शर्मा, जगदीश प्रसाद डांगी, सियाराम मीणा, मुकेश कुमार मीणा, अखंड प्रताप सिंह, साधना शर्मा और हरीश कुमार कटारा शामिल हैं।
राज्यस्तरीय जांच दल ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि इन अभ्यर्थियों की ओर से शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक योग्यता अर्जित करने के लिए किए गए नियमित अध्ययन की अवधि और उनके अनुभव प्रमाणपत्र में दर्शाई गई सेवा अवधि एक-दूसरे से ओवरलैप हो रही है। संविदा नौकरी के दौरान ही यह लोग दूसरे राज्यों से कंप्यूटर की डिग्री लेकर आए और अनुभव का बोनस लाभ लेकर लिपिक पद पर नियुक्त हो गए। जांच दल के अनुसार एक ही समयावधि में नियमित अध्ययन करने के साथ-साथ संबंधित संस्थान में सेवा किए जाने का दावा प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करता है। ऐसे में इन दोनों में से किसी एक दस्तावेज की सत्यता पर सवाल खड़ा होता है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच में अभ्यर्थी का अनुभव प्रमाण पत्र अथवा शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज कूटरचित या फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति रद्द करने की कार्रवाई की जाए। संबंधित अभ्यर्थी व दस्तावेज जारी करने वाले संस्थान के विरुद्ध फौजदारी मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।
राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट में इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अलवर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को आवश्यक निर्देश जारी किया जाना अपेक्षित बताया गया है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला परिषद स्तर पर इन 18 प्रकरणों में दस्तावेजों की पुनः जांच और आपराधिक कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।