
आमतौर पर चिकित्सक दिवस के मौके पर अस्पतालों में केक काटने, सेमिनार आयोजित करने या डॉक्टरों को सम्मानित करने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार अलवर के डॉक्टरों ने कुछ ऐसा अलग और अनूठा किया, जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
आज राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के खास अवसर पर डॉक्टरों और उनके परिवारों ने मिलकर शहर की सड़कों पर 'हरे कृष्ण' महामंत्र का कीर्तन करते हुए एक नगर संकीर्तन निकाला। चिकित्सा जगत के इतिहास में इस तरह का अनूठा और धार्मिक नवाचार अलवर शहर में पहली बार देखा गया है, जिसका असली मकसद डॉक्टर और मरीजों के बीच के रिश्ते को और अधिक मजबूत व संवेदनशील बनाना है।
यह भक्ति यात्रा शहीद स्मारक (कंपनी बाग) से बड़े ही उत्साह और आध्यात्मिक माहौल के साथ शुरू हुई। यहां से 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे…' की पावन गूंज के साथ डॉक्टर आगे बढ़े। यह संकीर्तन नंगली सर्किल होते हुए आईएमए (IMA) हॉल पर जाकर संपन्न हुआ। इस खास आयोजन में अलवर के करीब 65 डॉक्टरों और उनके परिवार के सदस्यों ने पूरे जोश के साथ भाग लिया। हाथों में झांझ मंजीरे और करताल लिए शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टर सड़क पर थिरकते हुए नजर आए।
संकीर्तन की शुरुआत होते ही तंवर कॉलोनी और लाल डिग्गी से आए प्रबुद्ध नागरिकों ने डॉक्टरों का माला और दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया। इसके बाद जैसे जैसे यह यात्रा आगे बढ़ी, रास्ते में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (MR) ने पुष्प वर्षा की। इसके साथ ही कृष्णा कॉलोनी, स्कीम 10, शिवाजी पार्क, रणजीत नगर, इंदिरा कॉलोनी, दाउदपुर फाटक, स्कीम 3, स्कीम 1 और स्कीम 2 के निवासियों ने अपने अपने घरों के बाहर खड़े होकर डॉक्टरों पर जमकर फूलों की बारिश की।
पूरे रास्ते डॉक्टरों का ऐसा स्वागत देखकर माहौल बेहद भावुक हो गया। इस अनोखे संकीर्तन में अलवर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. विजयपाल यादव, सचिव डॉ. के.के. मीणा, कोषाध्यक्ष डॉ. दीपक श्रीवास्तव, डॉ. गोपाल गुप्ता, डॉ. श्यामलाल गोयल, डॉ. सुभाष अग्रवाल, डॉ. उदयभान यादव, डॉ. प्रमोद रावत, डॉ. सरोज गुप्ता शामिल हुए।
इनके साथ ही सीएमएचओ डॉ. योगेंद्र शर्मा, पीएमओ डॉ. प्रवीण शर्मा, मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. इंदु सूद, डॉ. दिनेश सूद, डॉ. मोहनलाल सैनी आदि उपस्थित रहे। वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में डॉक्टरों के प्रति विश्वास बढ़ेगा। इससे डॉक्टर और जनता के बीच बेहतर तालमेल बैठेगा, जिससे मरीज डॉक्टरों का सम्मान करेंगे और डॉक्टर भी पूरी संवेदनशीलता के साथ मरीजों की देखभाल कर पाएंगे।