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Alwar: धमाकों से दहल रहे गांव, पावटा-नांगल चंदेल में पांच साल से चारागाह भूमि पर अवैध खनन का आरोप

अवैध पत्थर खनन के लिए किए जा रहे विस्फोटों से ग्रामीण परेशान हैं। पुलिस, वन विभाग और खनन विभाग की चौकियां पास होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहा है?
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अलवर

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Umesh Sharma

Jul 01, 2026

illegal mining

अवैध खनन का फाइल फोटो

अवैध पत्थर खनन के लिए किए जा रहे विस्फोटों से अलवर के टहला क्षेत्र के पावटा और नांगल चंदेल गांव दहल उठे हैं। कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि रात-दिन दौड़ते डंपर और ट्रैक्टरों ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। खास बात यह है कि पुलिस, वन विभाग और खनन विभाग की चौकियां पास होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहा है?
ग्रामीणों ने बताया कि नागल चंदेल की आराजी खसरा संख्या 247 तथा पावटा दामोदर की आराजी खसरा संख्या 127 की चरागाह भूमि पर अवैध खनन जारी है। खनन के कारण ग्राम पंचायत की ओर से पशुओं के लिए बनाए गए जल संग्रहण एनिकट को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। खनन स्थल के समीप गोशाला के साथ गड़रिया और लोहार समाज के कई परिवार निवास करते हैं। पहले भी इस तरह के मामले सामने आए हैं। हर बार फौरी तौर पर कार्रवाई करके पुलिस और खनन विभाग चुप हो जाते हैं और खनन माफिया फिर से सक्रिय होकर बेरोकटोक खनन करते हैं। शहर के आसपास भी कई जगहों पर इस तरह का खनन रात के वक्त होता है।

ग्रामीण भय में जीने को मजबूर

ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोटों से तेज धमाके और कंपन होते हैं, जिससे मकानों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। लगातार होने वाले धमाकों से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भय के साये में जीने को मजबूर हैं। ध्वनि प्रदूषण और विस्फोटों से वन्यजीवों तथा पशुधन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीण बच्चूसिंह, सरदार, राजाराम, विजयसिंह, बाबू, लेखराज और रामकिशन सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच कराने, अवैध खनन तत्काल बंद कराने, दोषियों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा चरागाह भूमि, पर्यावरण, पशुधन और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

रोज गुजरते 200 से ज्यादा वाहन

खनन क्षेत्र से प्रतिदिन 200 से अधिक डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध पत्थरों का परिवहन करती हैं। रात के समय इनकी आवाजाही और तेज हो जाती है। भारी वाहनों से गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कागजों तक ही सीमित नजर आती है।