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Alwar News: आंगनबाड़ी केंद्रों पर आज से काम बंद: आशा सहयोगिनियों का प्रदर्शन, तालाबंदी की चेतावनी

आंगनबाड़ी केंद्रों पर कामकाज ठप हो गया है। अपनी मांगों को लेकर आशा सहयोगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आज अलवर सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय पर प्रदर्शन किया। मांगे न माने जाने पर 7 जुलाई से पूर्ण तालाबंदी की चेतावनी दी गई है।
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anganwadi workers strike

अलवर में सीएमएचओ कार्यालय पर प्रदर्शन (फोटो - पत्रिका)

अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के आह्वान पर आज यानी 1 जुलाई से प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 'काम बंद हड़ताल' शुरू हो गई है। इसी कड़ी में आज अलवर में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गईं और जमकर नारेबाजी की।

संगठन के नेताओं का कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। इस बार कार्यकर्ता आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। आंदोलन की रणनीति के तहत आज से शुरू हुई हड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं केंद्रों पर तो जाएंगी, अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराएंगी, लेकिन कोई भी सरकारी काम नहीं करेंगी।

26 लाख बच्चों की पढ़ाई और पोषाहार अटकेगा

इस हड़ताल का सीधा असर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ने वाला है। राजस्थान में करीब 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनसे लगभग 1.25 लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएं जुड़ी हैं। इन केंद्रों पर करीब 26 लाख बच्चे रजिस्टर्ड हैं। अगर सिर्फ अलवर जिले की बात करें, तो यहां के 1,776 केंद्रों पर 3 से 6 साल के करीब 44 हजार से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। आज से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण बच्चों को मिलने वाला पोषाहार (राशन) वितरण और उनकी शुरुआती पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। इसके अलावा गांवों और शहरों में चल रहे सरकारी सेवा शिविरों का काम भी प्रभावित होगा।


6 दिन का अल्टीमेटम, 7 जुलाई से होगी तालाबंदी

कर्मचारी संघ के संस्थापक संरक्षक छोटेलाल बुनकर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह तो बस शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आज बुधवार से शुरू हुई यह हड़ताल अगले 6 दिनों तक ऐसे ही चलेगी। यदि इस दौरान सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया या बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकाला, तो आगामी 7 जुलाई से पूरे राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटका दिए जाएंगे।

इस आंदोलन को अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में आम जनता और खासकर ग्रामीण इलाकों में बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण से जुड़ी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होने वाली हैं। अब देखना होगा कि बुधवार को शुरू हुए इस गतिरोध को थामने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।