Alwar News: अलवर वन विभाग में सामने आए 18 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच में नया खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 17 करोड़ रुपए नकद निकाले गए। मामले में कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन कई ने जवाब तक नहीं दिया।
Alwar News: अलवर जिले में वन विभाग से जुड़ा 18 करोड़ रुपए का घोटाला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की जांच में अब एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जयपुर स्थित मुख्य वन संरक्षक कार्यालय की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल राशि में से लगभग 17 करोड़ रुपए नकद निकाले गए। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से कराने की सिफारिश की गई थी।
यह मामला अलवर वन मंडल की राजगढ़ रेंज में कराए गए अग्रिम मृदा कार्यों से जुड़ा है। करीब 11 कार्यस्थलों पर 650 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए कार्यों और सात ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समितियों के मूल्यांकन के दौरान गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिसके बाद करीब 18 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ।
जांच अधिकारी ने मामले में सात लोकसेवकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इनमें तकनीशियन और कार्यस्थल प्रभारी भागचंद सैनी तथा तत्कालीन सहायक वनपाल जसवंत सिंह ने जवाब दिया, जबकि अन्य पांच अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें रिमाइंडर नोटिस भी भेजे गए।
जांच के दौरान तत्कालीन डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव और वर्तमान डीएफओ राजेंद्र हुड्डा के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके लिए अखिल भारतीय सेवाएं अनुशासन एवं अपील नियम 1969 के तहत कार्रवाई का पत्र भी भेजा गया, लेकिन वन मुख्यालय ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी कारण दो डीएफओ सहित करीब 15 लोगों के खिलाफ कार्रवाई अब तक लंबित है।
यह मामला लोकायुक्त और वन सचिवालय तक भी पहुंच चुका है। पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद अब तक सख्त कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।