
अलवर जिले के सरकारी स्कूलों (Government Schools) में सुविधाओं की कमी को लेकर अब सरकार ने जवाब तलब किया है। जिले में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों के खेलने के लिए मैदान नहीं हैं। कहीं शौचालय (Toilets) की सुविधा नहीं है, तो कहीं बिजली (Electricity) और पेयजल (Drinking Water) जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। इतना ही नहीं, जर्जर स्कूल भवनों (School Buildings) को ढहाने के बाद उनके पुनर्निर्माण का काम भी लंबे समय से लंबित है। इन समस्याओं को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
राजस्थान पत्रिका ने 21 अक्टूबर को '70 स्कूलों में खेल मैदान नहीं, 72 में शौचालय, 71 में बिजली-पानी का अभाव' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति सामने रखी थी। खबर में बताया गया था कि किस तरह बड़ी संख्या में स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता चर्चित कौशिक ने भी मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर सरकारी स्कूलों की इन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (Chief Minister Office) और मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग ने इस पर कार्रवाई शुरू की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव कार्यालय से मिले निर्देशों के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव दिव्यांशु सिंह ने संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर और राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त, समसा (SMSA), जयपुर से तत्काल तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
आदेश में इस प्रकरण को मुख्य सचिव कार्यालय से प्राप्त होने के कारण अति महत्वपूर्ण बताया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे मामले के तथ्यों की जांच करें और नियमानुसार जरूरी कार्रवाई करें। साथ ही अब तक की गई कार्रवाई और स्कूलों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट भी तत्काल विभाग को उपलब्ध कराएं।
सरकार के निर्देश के बाद अब जिले के सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। खासतौर पर खेल मैदान, शौचालय, बिजली, पेयजल और जर्जर भवनों से जुड़े मामलों की रिपोर्ट तैयार होगी। विभाग ने इस प्रकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। अब देखना होगा कि रिपोर्ट मिलने के बाद इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और स्कूलों में बच्चों को जरूरी सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।