
फाइल फोटो (फोटो - पत्रिका)
दिवाली पर घर में लक्ष्मी पूजन हो या किसी को शुभकामना के साथ उपहार देना, चांदी के सिक्कों की खरीदारी का अपना अलग महत्व है। सोना-चांदी महंगा होने के बावजूद लोग अपनी जेब के अनुसार इनकी खरीदारी करते हैं। दिवाली सीजन में चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ने के साथ ही नकली सिक्के बेचकर ग्राहकों को ठगने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही जेब पर भारी पड़ सकती है। जालसाज चांदी के नाम पर गिलट, तांबा या जस्ता जैसे धातुओं पर परत चढ़ाकर सिक्के बेच देते हैं। ग्राहक इन्हें असली समझकर खरीद लेता है और बाद में ठगी का पता चलता है।
सर्राफा व्यापार कमेटी के अध्यक्ष दीपक गर्ग के अनुसार, सोना-चांदी हमेशा भरोसेमंद दुकान या व्यापारी से ही खरीदना चाहिए। कमेटी की ओर से भी चांदी के सिक्के जारी किए जाते हैं। खरीदारी के दौरान सिक्के की शुद्धता, वजन और खरीद की रसीद पर विशेष ध्यान देना चाहिए। केवल चमक देखकर चांदी की असलियत का फैसला करना सही नहीं है।
प्रदेशभर में चांदी के नाम पर नकली सिक्के बनाने और बेचने का खेल चल रहा है। जयपुर, अजमेर, कोटा और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में गिलट और जर्मन सिल्वर से सिक्के तैयार किए जा रहे हैं। इन सिक्कों को असली चांदी का बताकर ग्राहकों को बेचा जाता है। इसके बदले ग्राहकों से चांदी की पूरी कीमत वसूली जाती है। इस तरह मिलावट और धोखाधड़ी के जरिए लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में चांदी के सिक्के खरीदते समय उनकी शुद्धता की जांच करना जरूरी है।
असली चांदी के सिक्के को किसी अन्य धातु या सिक्के से थपथपाने पर घंटी जैसी तेज और साफ गूंजती हुई आवाज आती है, जबकि नकली या मिलावटी सिक्के से दबी और भारी आवाज आती है। असली चांदी के सिक्के पर बर्फ का टुकड़ा रखने पर वह सामान्य तापमान की तुलना में बहुत तेजी से पिघलने लगता है। असली चांदी चुंबकीय नहीं होती है। यदि सिक्का चुंबक की तरफ आकर्षित होता है या उससे चिपक जाता है, तो उसमें लोहे या अन्य धातुओं की मिलावट है। शुद्ध चांदी पर उसकी शुद्धता के निशान जैसे .999, .925 या हॉलमार्क का चिन्ह होता है।
Updated on:
13 Oct 2026 12:18 pm
Published on:
13 Oct 2026 12:18 pm
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