अलवर की लाइफलाइन जयसमंद बांध को भरने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नटनी का बारा से जयसमंद तक 12 किमी लंबी नहर को पक्का करने का काम दो साल के इंतजार के बाद आखिरकार शुरू हो गया है। इस पूरी परियोजना पर सरकार द्वारा करीब 39 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
नटनी का बारा से जयसमंद तक नहर को पक्का करने से अब मानसून के दौरान बारिश का कीमती पानी बर्बाद नहीं होगा और बिना रुके सीधे बांध तक पहुंचेगा। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण का काम आगामी मानसून के आगमन से ठीक पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत शुरुआती फेज में करीब 5 किलोमीटर लंबी नहर को पूरी तरह साफ करके कंक्रीट से पक्का किया जाएगा। निर्माण एजेंसी ने धरातल पर मुस्तैदी दिखाते हुए नहर की सफाई और चौड़ीकरण का काम शुरू भी कर दिया है। वर्तमान में कई चिन्हित स्थानों पर जेसीबी मशीनों से मिट्टी हटाने और नहर के किनारों को दीवार देकर मजबूत करने का कार्य बेहद तेजी से चल रहा है।
गौरतलब है कि अलवर जिले का यह ऐतिहासिक जयसमंद बांध पिछले कई वर्षों से सही तरीके से पूरा नहीं भर पाया है। अमूमन हर सीजन में इलाके में अच्छी और भारी बारिश होने के बावजूद इस बांध में केवल 10 फीट के आसपास ही पानी आ पाता है, जबकि इस विशाल बांध की कुल भराव गहराई 27 फीट से भी काफी ज्यादा है। बांध का पेटा लंबे समय से खाली रहने की वजह से यहाँ कई स्थानीय लोग और आसपास के किसान खाली पड़ी जमीन पर अपनी खेतीबाड़ी करने लगे हैं।
अब तक नटनी का बारा क्षेत्र से आने वाला बरसाती पानी जिस नहर के जरिए जयसमंद तक पहुंचता था, वह पूरी तरह कच्ची थी। नहर कच्ची होने के कारण पानी का एक बड़ा हिस्सा रास्ते में ही जमीन के अंदर रिस जाता था और पानी की रफ्तार भी काफी धीमी पड़ जाती थी। कई बार पहाड़ों से भारी मात्रा में पानी आने के बावजूद बांध प्यासा ही रह जाता था। अब नहर पूरी तरह पक्की होने से न केवल पानी का यह रिसाव बंद होगा, बल्कि आने वाले समय में अलवर शहर की पेयजल व्यवस्था को भी एक नई मजबूती और नया जीवन मिलेगा।
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस पूरी जरूरी परियोजना को करीब दो साल पहले ही अपनी हरी झंडी दे दी थी, लेकिन सरकारी विभागों की सुस्त टेंडर प्रक्रिया के चक्कर में यह महत्वपूर्ण काम लंबे समय तक उलझा रहा। कुछ तकनीकी कमियों और नियमों के चलते दो बार इसके टेंडर निरस्त करने पड़े थे। अब नए सिरे से वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद धरातल पर निर्माण कार्य ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है, जिससे इस बार बारिश में बांध के पूरी तरह भरने की एक बड़ी उम्मीद जगी है।