अलवर

Alwar News: कनिष्ठ तकनीकी सहायकों व लेखा सहायकों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू

अलवर में वीबी-जी-रामजी यानी नरेगा योजना के तहत संविदा पर काम कर रहे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (JTA) और लेखा सहायकों को जिला परिषद ने नियमित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी संबंधित अधिकारियों से उनके दस्तावेजों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की फाइनल रिपोर्ट मांगी है।
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Jul 09, 2026
nrega regularization process
जिला परिषद फाइल फोटो (पत्रिका)

राजस्थान के अलवर जिले में वीबी-जी-रामजी यानी नरेगा योजना के तहत संविदा पर काम कर रहे कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (JTA) और लेखा सहायकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जिला परिषद ने इन्हें नियमित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी संबंधित अधिकारियों से उनके दस्तावेजों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की फाइनल रिपोर्ट मांगी है।

जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत संविदा सीधी भर्ती-2024 के जरिए चुने गए कनिष्ठ तकनीकी सहायकों और लेखा सहायकों की नौकरी को स्थाई (नियमित) करने की कवायद अब अपने आखिरी दौर में पहुंच गई है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक ने इस संबंध में सभी विकास व कार्यक्रम अधिकारियों को एक कड़ा और अंतिम स्मरण पत्र (रिमाइंडर नोटिस) जारी किया है।


इस आदेश के तहत अफसरों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे चयनित अभ्यर्थियों की डिग्री, डिप्लोमा और अंकतालिकाओं का संबंधित यूनिवर्सिटी या संस्थान से तुरंत वेरिफिकेशन करवाएं। इसके साथ ही दिव्यांग कोटे से चुने गए कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण करवाकर अगले 3 दिन के भीतर हर हाल में अपनी स्पष्ट रिपोर्ट जिला परिषद कार्यालय को सौंपें।

142 संविदा कर्मचारियों को मिलेगा सरकारी नौकरी का तोहफा

राज्य सरकार के निर्देशों के बाद अलवर जिले की अलग-अलग पंचायत समितियों में कुल 142 संविदा कर्मचारियों को तैनात किया गया था। इनमें 123 कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA) और 19 लेखा सहायक शामिल हैं। जब इन पदों पर नियुक्ति दी गई थी, तभी यह शर्त रखी गई थी कि सभी की शैक्षणिक योग्यताओं की जांच संबंधित बोर्ड या यूनिवर्सिटी से कराई जाएगी।

इसके लिए विभाग ने पहले भी कई बार चिट्ठी जारी की थी, लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों की ढिलाई के चलते कई कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट अब तक मुख्यालय नहीं पहुंच सकी थी। इसी देरी को देखते हुए अब जिला परिषद सख्त मोड में आ गया है। इस बार साफ चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय यानी तीन दिनों के भीतर वेरिफिकेशन और मेडिकल रिपोर्ट नहीं भेजी गई, तो लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

संविदा कर्मियों में खुशी की लहर

जिला परिषद की इस सख्ती और मुस्तैदी के बाद अब सालों से संविदा पर काम कर रहे इन युवाओं में खुशी की लहर है। डिग्री और मेडिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही इन सभी कनिष्ठ तकनीकी सहायकों और लेखा सहायकों के नियमितीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इस फैसले से न केवल कर्मचारियों को मानसिक राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों और खातों के रख-रखाव में भी काफी तेजी आएगी।

Updated on:
09 Jul 2026 02:23 pm
Published on:
09 Jul 2026 02:23 pm