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Alwar: यूआइटी ने मोती डूंगरी में 27 साल पहले 56 घरों पर चलाया था बुलडोजर, अब देने होंगे पट्टे

यूआइटी के कोर्ट हो या सरकार किसी के आदेश मायने नहीं रखते। ट्रस्ट ने 27 साल पहले मोतीडूंगरी इलाके में 56 घरों पर बुलडोजर चलाया था। तब से यह जगह खाली है, लेकिन अब सरकार ने यहां पट्टे जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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अलवर

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Umesh Sharma

Jul 09, 2026

uit alwar

कॉलोनी में कुछ लोग कच्चे मकान बनाकर रह रहे हैं।

अलवर नगर विकास न्यास (यूआइटी) को झटका लगा है। शहर के मोती डूंगरी इलाके में 27 साल पहले जिन 56 घरों पर बुलडोजर चलाया था, अब उनके पट्टे जारी करने होंगे। नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के शासन उप सचिव रवि विजय ने यूआइटी को पत्र भेजकर पूरी रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में लोगों में एक उम्मीद जगी कि उन्हें आवास मिल जाएंगे। यूआइटी ने जमीन को अपनी आवासीय कॉलोनियों के लिए अधिग्रहित किया था।

जिंदगीभर की कमाई आवास में लगाई, पलभर में बिखर गए थे सपने

मोती डूंगरी एलआइसी कार्यालय के पीछे के एरिया में स्कीम नंबर आठ के विस्तार के लिए यूआइटी ने 1 दिसंबर, 1999 को जमीन का अधिग्रहण किया। इस जमीन पर 84 खातेदार थे, जिनके नाम रजिस्ट्री थी। जब लोगों को पता लगा कि उनकी जमीन यूआइटी लेना चाह रही है, तो वह तहसील इंतकाल के लिए पहुंचे, लेकिन तब तक यह जमीन यूआइटी के नाम हो चुकी थी। इन खातेदारों के पास केवल रजिस्ट्री थी। लोगों के मुताबिक यूआइटी ने उस दौरान किसी से भी सहमति नहीं ली और न सामूहिक बैठक की। मनमाने तरीके से जमीन अधिग्रहण हो गया। यूआइटी ने जमीन अधिग्रहण के लिए 56 आवासों पर बुलडोजर चला दिए। कुछ भूखंड खाली थे। कुछ फौजियों ने भी यहां मकान बनाए थे।

इस तरह दोनों कोर्ट से मिली खातेदारों को राहत

कुछ समय बाद खातेदार एसीजेएम तृतीय के न्यायालय पहुंचे। कोर्ट ने यूआइटी को नोटिस जारी किए, लेकिन संतोषजनक जवाब न होने के बाद कोर्ट ने 10 अक्टूबर, 2013 को रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेजों के आधार पर खातेदारों को पट्टे जारी करने के आदेश दिए। यही नहीं, जब यूआइटी ने आदेश का पालन नहीं किया, तो 13 लोग हाईकोर्ट पहुंच गए, जहां 1 फरवरी, 2023 को हाईकोर्ट ने इन सभी खातेदारों को पट्टे जारी करने के आदेश दिए। आदेश का पालन आज तक नहीं हो पाया, तो लोग सरकार के पास पहुंचे, जहां शासन उप सचिव ने अब यूआइटी को पत्र जारी कर पूरी रिपोर्ट मांगी है। पट्टे जारी करने में आ रही बाधा को भी जाना है।

जमीन खाली, कच्चे घर बने हुए

जहां खातेदारों के आवास थे, अब वह जमीन खाली पड़ी है। वहां कच्चे घर किसी ने बना लिए और पशुपालन हो रहा है। यानी 27 साल से यह जमीन न खातेदारों के काम आई और न यूआइटी इस पर आवास बना पाई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यूआइटी को ऐसी जमीन अधिग्रहण का क्या फायदा मिला?