
- बसपा, सपा के अलावा राजपा ने यहां से खोला खाता, इस बार ये दल चुनावों में, इनके कुछ प्रत्याशियों ने बड़े दलों को ला दिया पसीना
- कांग्रेस व भाजपा इन प्रत्याशियों की काट के लिए पैंतरे अपना रही, बड़े दलों के प्रत्याशी भी अलग रणनीति बनाने में जुटे
यूं तो राजनीति में आने वाला हर शख्स राष्ट्रीयकृत पार्टियों से टिकट लेने के लिए प्रयास करता है लेकिन कई बार बड़ी पार्टियां जब टिकट नहीं देती हैं तो उम्मीदवार क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरते हैं और फतह भी करते हैं। अलवर की राजनीतिक जमीन पिछले कई चुनाव में क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए उपजाऊ साबित हुई है।
इस तरह खोला था क्षेत्रीय दलों ने खाता
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में अलवर जिले की थानागाजी विधानसभा सीट से कांति प्रसाद मीणा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और चुनाव जीत गए। वर्ष 2008 में राजस्थान में समाजवादी पार्टी को केवल एक सीट मिली। यह सीट अलवर जिले की राजगढ़- लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट थी जिस पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सूरजभान धानका ने जीतकर समाजवादी पार्टी का खाता खोला था। इसी तरह वर्ष 2013 में किरोडी लाल मीणा ने नई पार्टी राजपा का गठन किया। पूरे राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे लेकिन जीत केवल पांच सीटों पर मिली । उनमें एक सीट अलवर जिले की राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ थी, जहां से गोलमा देवी को जीत मिली।
बसपा की जीत वाली 6 सीटों में से दो अलवर की
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को राजस्थान में केवल 6 सीटों पर जीत मिली थी, इनमें दो सीट अलवर जिले में थी। किशनगढ़बास से बसपा के टिकट से दीपचंद खैरिया और तिजारा से बसपा के संदीप यादव को जीत मिली। इनके अलावा निर्दलीयों ने भी कम दम नहीं दिखाया। इसी चुनाव में थानागाजी विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी कांति प्रसाद मीणा को जीत मिली और बहरोड़ में निर्दलीय प्रत्याशी बलजीत यादव के सिर ताज सजा।
निर्दलीयों ने भी दिखाया है दम
इससे पहले वर्ष 1993 में हुए चुनाव में अलवर में कई निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जो बाद में भैरो सिंह शेखावत की सरकार में मंत्री भी बने। उनमें से एक मंगल राम कोली थे। अब हो रहे चुनाव में अलवर में बसपा, आजाद समाज पार्टी, नेशनल पीपुल्स ग्रीन पार्टी, आम आदमी पार्टी के कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा कई निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। बताया जा रहा है कि इन पार्टियों व निर्दलीय कुछ प्रत्याशियों ने भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के पसीना ला दिया है। पार्टियां खुद इसका तोड़ निकालने में जुटी हैं ताकि जीत हासिल हो सके।