
विकास जैन
Alwar Lok Sabha Seat Election 2024: जयपुर से दौसा, सिकंदरा, बांदीकुई होते हुए करीब 115 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद सीधे अलवर लोकसभा क्षेत्र के राजगढ़ कस्बे में कदम रखा। थाने से कुछ कदम पहले ही चाय की दुकान पर पांच-छह लोगों को बैठे देखकर वाहन रोका। राजा भृर्तहरि की भूमि पर इस चुनावी दंगल की चर्चा छेड़ी तो मतदाता की उदासी साफ झलक पड़ी।
लल्लूराम, रामजीलाल, मंगतूराम और कजोड़मल को तो इस बार कांग्रेस और भाजपा से कौन चुनाव लड़ रहे हैं यह तक जानकारी नहीं थी। क्षेत्र की समस्याओं पर बोले इसकी परवाह किसे है? सरपंच हो... विधायक हो या फिर सांसद...। सब चुनाव के समय ही घूमते हैं। जीतने के बाद गायब हो जाते हैं।
राजगढ़ से अलवर के रास्ते में मिले छोटूलाल ने कहा कि यहां रोजगार के साधन ही नहीं है। कोई भी सरकार आए, असल मुद्दों पर कोई बात नहीं करता। यहीं बैठीं सीमा ने कहा कि उनके घर में एक बूंद पानी नहीं आता। चुनाव में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं पर जीतने के बाद वो उनके और हम हमारे। लोकसभा चुनाव में माहौल के लिए पूछने पर सीमा बोलीं अभी तो किसी का माहौल नहीं है, आखिरी दिन तक देखेंगे किसका माहौल होता है, उसी आधार पर वोट देंगे...वैसे उम्मीद इनको किसी से नहीं है।
लक्ष्मणगढ़ विधानसभा के मालाखेड़ा कस्बे से तीन किलोमीटर आगे सड़क किनारे एक छोटी दुकान पर बैठे कलसाणा गांव के विजेन्द्र, हरिकिशन और शैलेन्द्र से पूछा तो बोले- गांवों में जाकर देखिये सड़कें तक नहीं है। सब वोट लेने के लिए ही आते हैं। पूछने पर कहा वोट का फैसला करने का अभी समय नहीं आया है। किशनगढ़ बास उपखण्ड कार्यालय में खैरथल से आए लक्ष्मीनारायण, हरिकिशन, सरपंच प्रतिनिधि अशोक कुमार आदि ने बताया की आठ साल से पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। यहां ओवरब्रिज की जरूरत है।
चुनावी माहौल अभी पूरे रास्ते में कहीं नहीं दिखा, स्थानीय राजनीति और जातिगत समीकरणों के ही हावी रहने की बात यहां के लोग भी स्वीकारते हैं। तिजारा क्षेत्र में भी माहौल में चुनावी गरमाहट नजर नहीं आई। यहां जनता में उत्साह नहीं दिखा। गांवों में सड़कों, अस्पतालों में डॉक्टरों, जांच और प्रसव सुविधाओं का सर्वत्र अभाव दिखा। भिवाड़ी में नगर परिषद की उठापटक की चर्चा जरूर सुनने को मिली।
इस बार रोचक रहेगा चुनावी दंगल
अलवर जिले में 11 विधानसभा सीट हैं। जिसमें 6 कांग्रेस और 5 भाजपा के पास है। अलवर लोकसभा सीट में कुल आठ विधानसभा सीट आती है। इनमें पांच पर कांग्रेस और तीन पर भाजपा का कब्जा है। शेष तीन सीटों में बानसूर सीट जयपुर ग्रामीण, कठूमर सीट भरतपुर और थानागाजी सीट दौसा लोकसभा क्षेत्र में आती है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के नजरिए से देखा जाए तो इस बार यहां मुकाबला कांटे का माना जा रहा है। हालांकि भाजपा से यहां केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और कांग्रेस से मुंडावर विधायक ललित यादव चुनावी मैदान में है। मंत्री यादव स्थानीय नहीं हैं, लेकिन केंद्र में मंत्री होना उनके पक्ष को मजबूती प्रदान करता है, लेकिन ललित यादव स्थानीय हैं और कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे को खूब हवा देकर मुकाबले को कांटे का बनाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।
जूली, भंवर जितेन्द्र, संजय शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा जहां पेपर लीक पर हुई कार्रवाई, ईआरसीपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामों के दम पर जनता के बीच जा रही है तो कांग्रेस स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार के साथ ही राजस्थान की मौजूदा भाजपा सरकार की विफलता का लेखा-जोखा जनता के सामने रख रही है। मतदाता मौन है, मगर इसे दोनों पार्टियां ही अपने-अपने पक्ष में स्वीकृति मान कर अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। यह चुनाव भले ही भूपेन्द्र यादव और ललित यादव के बीच हो, लेकिन जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेन्द्र और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ ही भाजपा के दिग्गज नेता राजस्थान सरकार में मंत्री संजय शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।