अभी तक सरकारी खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल व्यापारियों को ही बेचनी पड़ रही है। सरसों के दामों में 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई है।
अलवर। कृषि उपज मंडी में इन दिनों सरसों की आवक बढ़ गई है। रोजाना करीब तीन से चार हजार कट्टे मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद अब तक शुरू नहीं होने से किसान खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।
सरकार ने सरसों का एमएसपी 6200 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मंडी में नई सरसों के भाव 5000 से 6200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं। वहीं, पुरानी और नई सरसों के दामों में 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई है।
शनिवार को भी मंडी में दोनों प्रकार की सरसों के भाव कमजोर रहे। व्यापारियों के अनुसार मंडी में आ रही सरसों में 18 से 22 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है, जिससे दाम प्रभावित हो रहे हैं। यदि किसान सरसों को अच्छी तरह सुखाकर लाएं तो गुणवत्ता बेहतर होगी और भाव भी अच्छे मिल सकते हैं।
अभी तक सरकारी खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। ऐसे में उन्हें व्यापारियों को ही फसल बेचनी पड़ रही है। किसानों का आरोप है कि यदि समय पर एमएसपी पर खरीद शुरू हो जाए, तो उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं और नुकसान से बचाव होगा। वहीं, एक ओर बाजार में गिरते दाम और दूसरी ओर सरकारी खरीद में देरी से किसान परेशान हैं।