
अलवर शहर के बाजारों में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए बने तमाम प्रस्ताव कागजों से आगे नहीं बढ़ पाए। जहां भी पार्किंग की जगह तलाश कर योजना तैयार की गई, वहां जमीन, स्वामित्व, तकनीकी या अन्य किसी पेच ने रास्ता रोक दिया। नतीजा यह कि बाजारों में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को अब सड़क किनारे ही वाहन खड़े करने पड़ेंगे और शहर को जाम की समस्या के लिए तैयार रहना होगा।
पार्किंग के स्थायी समाधान के बजाय यूआइटी और नगर निगम की कवायद फाइलों में उलझी नजर आ रही है। नगर निगम चुनाव में यह मुद्दा फिर चर्चा में है। व्यापारियों से लेकर आमजन पार्किंग चाहते हैं। जगह न मिलने के कारण मजबूरी में उन्हें वाहन सड़कों पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं।
चुनौती के रूप में लेना होगा, तभी पार्किंग बनेगी
अलवर के बाजार में पार्किंग की बहुत ज्यादा जरूरत है। इसके लिए प्रशासन को फिर कवायद करनी चाहिए। जिन जगहों का चयन किया गया था, वहां कमियां निकाली गई, जबकि मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हुए उस प्रोजेक्ट को चुनौती के रूप में लेना चाहिए था। तांगा स्टैंड पर मैकेनाइज पार्किंग बन सकती थी, लेकिन यहां शौचालय बनाकर जगह घेर दी, जबकि यह शौचालय चूड़ी मार्केट के पास खाली जमीन पर बन सकता था। पुरानी तहसील की जमीन का ऑक्शन नहीं हो पाया। वहां भी पार्किंग का संचालन हो सकता है। कंपनी बाग का प्रस्ताव सबसे अच्छा था, लेकिन उसे भी उलझा दिया गया - प्रमोद शर्मा, रिटायर्ड एक्सईएन, यूआइटी
बाजार में कहां-कहां पार्किंग बनाई जा सकती हैं, इसके लिए सर्वे करवाएंगे। जल्द ही रिजल्ट सामने आएंगे - बीना महावर, कार्यवाहक सचिव, यूआइटी