अलवर

Alwar News: मत्स्य विवि में 61 करोड़ के निर्माण कार्य, पर ड्रेनेज सिस्टम गायब; बारिश में डूबेगा कैंपस!

अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में करीब 61 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन बन रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरे कैंपस के लिए अब तक ड्रेनेज सिस्टम ही नहीं बनाया गया है। बारिश में पुराने भवनों में पानी भर रहा है, जिससे भविष्य में जलभराव का खतरा पैदा हो गया है।
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Aug 11, 2026
alwar matsya university
मत्स्य विश्वविद्यालय में चल रहा निर्माण कार्य (फोटो - पत्रिका)

अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में करीब 61 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन पूरे कैंपस के लिए अब तक ड्रेनेज सिस्टम तैयार नहीं किया गया है। बारिश के दौरान पुराने भवनों में पानी भरने की समस्या सामने आ रही है। वहीं, निर्माणाधीन और प्रस्तावित भवनों से निकलने वाले बारिश के पानी की निकासी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ऐसे में भविष्य में कैंपस में जलभराव की समस्या बढ़ने की आशंका है। विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के साथ समुचित ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

विकसित हिस्सों को दोबारा खोदना पड़ेगा

खास बात यह है कि गेस्ट हाउस, कुलपति भवन, खेल मैदान, लाइब्रेरी समेत अन्य भवनों की डीपीआर में भी ड्रेनेज सिस्टम का प्रावधान नहीं है। विश्वविद्यालय कैंपस में लगातार नए भवनों का निर्माण हो रहा है। यदि भवन तैयार होने के बाद पानी की निकासी के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ी तो सड़कों और अन्य विकसित हिस्सों को दोबारा खोदना पड़ेगा। इससे न केवल कैंपस की व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि निर्माण पर अतिरिक्त खर्च भी आएगा। ऐसे में भवनों के साथ ही पूरे कैंपस का ड्रेनेज प्लान तैयार करना जरूरी है।

कैंपस की मिट्टी नहीं सोखती पानी

विश्वविद्यालय परिसर की सबसे बड़ी समस्या यहां की मिट्टी है। कैंपस में चिकनी मिट्टी होने के कारण पानी का अवशोषण बहुत कम होता है। बारिश के बाद पानी जमीन में आसानी से नहीं उतर पाता और लंबे समय तक जमा रहता है। कई स्थानों पर पानी सूखने में भी काफी समय लगता है। ऐसे में केवल बारिश का पानी प्राकृतिक तरीके से जमीन में उतारने पर निर्भर रहना कारगर नहीं है।

पहले प्लान बने, फिर निर्माण

विश्वविद्यालय में लगातार भवन निर्माण की जरूरत को देखते हुए कैंपस के लिए एक समग्र ड्रेनेज प्लान तैयार करना जरूरी है। इसमें बारिश के पानी की निकासी, संग्रहण और जरूरत के अनुसार पुन: उपयोग की व्यवस्था को शामिल किया जा सकता है। यदि अभी ड्रेनेज की योजना तैयार कर निर्माण कार्यों के साथ इसे लागू किया जाता है तो भविष्य में सड़कों और भवनों के आसपास खुदाई से बचा जा सकेगा।


इनका कहना है

विश्वविद्यालय में ड्रेनेज का प्लान तैयार करने के लिए आरएसआरडीसी को बोला गया है। बेसमेंट में भरने वाले पानी की समस्या खत्म करने के लिए प्लान तैयार किया जाएगा - हेमराज परिड़वाल, रजिस्ट्रार, मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर

Updated on:
11 Aug 2026 11:53 am
Published on:
11 Aug 2026 11:53 am