अलवर

अलवर चिकित्सालय में करोड़ों रुपए आय, लेकिन मरीजों का है ऐसा हाल, जानकर आपको भी होगा दुख!

अलवर के सामान्य चिकित्सालय में करोड़ों की आय होती है, लेकिन यहां मरीजों को यह मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल पा रही है।
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May 08, 2018
Alwar Medical News : No facilities in alwar general hospital

अलवर. गरीबों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए शुरू की गई भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में भी सरकार कमाई के लिए अस्पतालों की ओर मुंह ताक रही है। यही कारण है कि अलवर जिले में सामान्य अस्पताल से गत वर्ष 80 लाख और चालू वर्ष में 81 लाख की राशि तो मंगा ली, लेकिन अस्पताल को इलाज की जरूरी दवा तक उपलब्ध नहीं कराई। इन दिनों अस्पताल में हालत यह है कि बीपी, शूगर, आयरन, थायराइड जैसीे कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं है।

जिला मुख्यालय अलवर स्थित सामान्य अस्पताल के आउट डोर में प्रतिदिन तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं अस्पताल के वार्डों में 300 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। खास बात यह है कि अस्पताल में जिले भर के मरीज भामाशाह सहित अन्य योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में आते हैं। यही कारण है कि योजना के तहत अस्पताल को बीते साल तीन करोड़ 21 लाख 61 हजार 248 रुपए की आय हुई। वहीं इस साल भामाशाह योजना में अस्पताल को तीन करोड़ 27 लाख 83 हजार 368 रुपए मिले हैं। बीते साल अस्पताल की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को भामाशाह योजना मद में 80 लाख 40 हजार 360 रुपए भेजे गए थे। वहीं इस साल 81 लाख 95 हजार 842 रुपए स्वास्थ्य विभाग को भेजे जा चुके हैं। अस्पताल के बैंक खाते में अभी करीब 1.75 करोड़ रुपए और जमा हैं, जिन पर स्वास्थ्य विभाग की नजर है।

दवा नहीं मिलने से क्या आ रही है दिक्कत

अस्पताल में दूर दराज के गांवों से आने वाले मरीजों के पास दवा के पैसे नहंी होते हैं। कुछ मरीजों के पास तो पर्ची की फोटो कॉपी तक कराने के पैसे नहीं होते हैं। उन मरीजों को दवा नहीं मिलने से उपचार में परेशानी आती है।

सरकार मांग रही राशि, अस्पताल में दवा नहीं

सामान्य अस्पताल में बीपी की टेलमी साटन, लासार्टन, शूगर की पायोबीटाजॉन 15 एमजी, टैनीगलीप्टीन 20 एमजी, मानसिक रोगियों के लिए टाइएचपीफंडेन, कैल्शियम, एटीबायोटिक, सिरप सालबुटामॉल सहित अन्य 30 से अधिक जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह के हालात अस्पताल के वार्डों में हैं। कई जरूरी इंजेक्शन व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। जनाना व शिशु अस्पताल में भी कुछ इसी तरह के हालात हैं। प्रत्येक प्रसूता को कैल्शियम की आवश्यकता होती है। लेकिन कैल्शियम की दवा नहीं होने से मरीज व प्रसूताओं को परेशानी हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब

जिले में 36 सीएचसी व 120 पीएचसी हैं। इनमें इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है व मरीजों को दवाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता है। मरीज को तुरंत अलवर के लिए रैफर कर दिया जाता है।

Published on:
08 May 2018 09:05 am