पुलिस ने घटना की रात लापरवाही बरती, इस वजह से रकबर की मौत हो गई।
रामगढ़ थाने से महज सात किलोमीटर दूर ललावंडी के उस खेत में 21 जुलाई की रात पहले मॉब लिंचिंग हुई। फिर पुलिस की जबरदस्त लापरवाही का खेल। रात 12.41 पर घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस करीब सात किलोमीटर दूर ललावंडी गांव पहुंची। पुलिस ने अधमरी हालत में खेत में पड़े रकबर को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाय पहले उसके साथी को तलाशा। फिर उसके बाद रास्ते में गोविंदगढ़ मोड़ स्थित चाय की थड़ी पर चाय पी। फिर रामगढ़ थाने पहुंचे। वहां रकबर को नहलाकर कपड़े बदलवाए और फिर हवालात में बंद कर दिया।
एसआई मोहनसिंह व अन्य पुलिसकर्मियों अपनी गाड़ी से गायों के टैम्पो के पीछे-पीछे गोशाला चले गए। गायों को गोशाला छोडकऱ लौट रही पुलिस की गाड़ी रात 3.47 बजे के फुटेज कस्बे में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हुए। वहां से आने के बाद एएसआई ने रकबर को बेहोशी की हालत में सुबह चार बजे अस्पताल पहुंचाया। जहां पहुंचते ही चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नाराज होकर थानेे से लौटे ग्रामीण
गोतस्कर रकबर से मारपीट के आरोप में हिरासत में लिए गए आरोपियों की रिहाई के लिए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने रामगढ़ थाने पहुंचे ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज होकर वापस लौट गए। दरअसल, ग्रामीणों के थाने में पहुंचने के कुछ देर बाद मृतक रकबर के परिजन व समुदाय के लोग थाने पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मिलने के लिए पहले बुला लिया। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने कहा कि अब वे ज्ञापन नहीं देंगे।
गोरक्षा के नाम पर यहां वसूली का नेटवर्क चलता है। गोकशी के लिए गोवंश ले जाने वाले तो कथित गोरक्षकों को पैसे दे देते हैं। गोपालक जो गाय खरीदकर लाते हैं वे पैसे देने में आनाकानी करते हैं। एेसे लोगों से ये लोग मारपीट करते हैं और कई बार फायरिंग भी कर देते हैं। एेसा बरसों से चल रहा है। इसका पुलिस सहित सबको पता है।
जमशेद खान, जिलाध्यक्ष, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, कांग्रेस।