
अलवर जिले में मानसून की बारिश ने औसत का आंकड़ा छू लिया है। एक जून से अब तक जिले में 373 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि का औसत 366 मिमी है। हालांकि पूरे मानसून सीजन का औसत करीब 545 मिमी है, ऐसे में अभी 171 मिमी बारिश की कमी है। बारिश के बावजूद जिले के जलस्रोतों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 129 बांधों में से 117 अब भी सूखे हैं। महज 12 बांधों में ही पानी की आवक हुई है। इससे आगामी दिनों में जलसंकट को लेकर चिंता बनी हुई है।
तालाब-जोहड़ तक पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। जिले की प्रमुख रूपारेल नदी में इस मानसून के दौरान सिर्फ एक बार करीब तीन इंच का बहाव आया। कुछ समय बाद बहाव खत्म हो गया और नदी फिर सूखी नजर आने लगी। साहबी नदी में तो अब तक पानी नहीं आया है। दोनों नदियों की स्थिति इस बार कमजोर बारिश और जलस्रोतों तक कम पहुंच रहे पानी की तस्वीर साफ कर रही है। अलवर जिले के सबसे बड़े जयसमंद बांध में एक बूंद पानी की आवक नहीं हुई हैं। सिलीसेढ़ में पिछले साल अगस्त की शुरुआत में चादर चली थी। इस बार तस्वीर अलग है। बांध में अभी करीब तीन फीट जगह खाली है।
मानसून अभी बाकी है और पहाड़ी व कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार अच्छी बारिश होने पर बांधों में तेजी से पानी पहुंच सकता है। लेकिन एक-दो तेज बारिश के बजाय लगातार बारिश होने पर ही सूखे जलस्रोतों की स्थिति बदलने की उम्मीद है। जिले की खेती और पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के लिए अब अगस्त की बारिश सबसे महत्वपूर्ण है। बीते दिन अलवर जिले भर में कई जगह पर बारिश हुई। इसमें मंगलसर 2, रामगढ़ मैं 8, लक्ष्मणगढ़ 11, कठूमर 28, मालाखेड़ा 21, राजगढ़ 15, बहादुरपुर 4, थानागाजी 4, गोविन्दगढ़ मैं 7 मिमी पानी बरसा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है।
सिलीसेढ़ में 25.10 फीट, मंगलसर में 28.11, मानसरोवर में 15, जयसागर में 10.6, समरसरोवर में 6. मेवखेडा में 2.6, तालाब में 1, आगर में 11, बिरखड़ी में 4.6, खोह में 3 और रानी कलां न्यू में 2 फीट पानी दर्ज किया गया है।