अलवर

Khatushyamji Yatra: 3 फीट के पट्टे पर 1000 कील… रोज 8 KM दंडवत; अलवर के नितेश की खाटूधाम की अनोखी यात्रा

Khatu Shyam ji yatra: जब आस्था अपने चरम पर होती है, तो भक्त कठिन से कठिन मार्ग भी चुन लेता है। ऐसा ही एक अनोखा उदाहरण अलवर शहर में देखने को मिला, जहां अशोका टॉकीज क्षेत्र निवासी नितेश ने गुरुवार को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खाटूधाम के लिए अपनी दंडवत यात्रा शुरू की।

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Mar 21, 2026
अलवर. एक हजार कीलों पर दंडवत परिक्रमा करते हुए। फोटो पत्रिका

अलवर। जब आस्था अपने चरम पर होती है, तो भक्त कठिन से कठिन मार्ग भी चुन लेता है। ऐसा ही एक अनोखा उदाहरण अलवर शहर में देखने को मिला, जहां अशोका टॉकीज क्षेत्र निवासी नितेश ने गुरुवार को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खाटूधाम के लिए अपनी दंडवत यात्रा शुरू की। यह यात्रा सामान्य नहीं, बल्कि बेहद कठिन और श्रद्धा से भरी है, क्योंकि नितेश 3 फीट के पट्टे पर लगी करीब एक हजार कीलों पर दंडवत करते हुए खाटू श्याम जी के दरबार तक पहुंचने का संकल्प लेकर निकले हैं।

नितेश की यह यात्रा करीब डेढ़ माह में पूरी होने का अनुमान है। वे प्रतिदिन लगभग 8 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। हर कदम पर कीलों वाले पट्टे पर दंडवत करना न सिर्फ शारीरिक रूप से बेहद कठिन है, बल्कि इसके लिए अद्भुत मानसिक शक्ति और अटूट विश्वास की भी जरूरत होती है। राह चलते लोग इस दृश्य को देखकर हैरान भी हो रहे हैं और उनकी आस्था को नमन भी कर रहे हैं।

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15 साथियों की टीम

इस कठिन यात्रा में नितेश अकेले नहीं हैं। उनके साथ करीब 15 सदस्यों की टीम भी चल रही है, जो उनके भोजन, विश्राम और अन्य व्यवस्थाओं का ध्यान रख रही है। खास बात यह है कि इस पूरी यात्रा के लिए नितेश ने किसी से आर्थिक सहयोग नहीं लिया है। पूरी व्यवस्था उन्होंने और उनके साथियों ने अपने स्तर पर ही की है।

इससे पहले भी कर चुके हैं दंडवत यात्रा

नितेश की आस्था का यह सफर पहली बार नहीं है। इससे पहले भी वे 501 कीलों वाले पट्टे पर दंडवत यात्रा कर चुके हैं। करीब पांच साल पहले उन्होंने दोस्तों के साथ पहली बार खाटूधाम की पदयात्रा की थी। तभी से उनकी श्रद्धा लगातार बढ़ती गई और अब वे हर महीने एकादशी पर खाटू श्याम जी के दर्शन करने जाते हैं।

जब उन्होंने पहली बार कीलों के पट्टे पर दंडवत यात्रा का निर्णय लिया था, तब उनके परिवार ने इसका विरोध किया था। लेकिन उनकी अटूट आस्था और संकल्प के आगे परिवार को भी झुकना पड़ा। आज उनके पिता पूरन सिंह को अपने बेटे की श्रद्धा और हौसले पर गर्व है। नितेश की यह यात्रा न सिर्फ भक्ति का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाती है कि सच्ची आस्था इंसान को असंभव लगने वाले रास्तों पर भी आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

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Published on:
21 Mar 2026 03:07 pm
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