किसानों को इस साल प्याज से अधिक मुनाफा कमाने की उम्मीद है, गत वर्ष किसानों को प्याज के ऊंचे भाव मिले थे
अलवर. अलवर जिलें की नगदी फसल प्याज से किसानों को इस बार भी अच्छी आस है और किसान फसल की जल्द तैयार होने की बांट देख रहा है, जिससे उसे इस फसल का अच्छा मुनाफा मिल सके। पन्द्रह दिन बाद ही अलवर मंडियों में प्याज की आवक शुरू हो जाएगी। देश के कई भागों में इस बार भी प्याज की पैदावार खराब होने से अलवर की नजर सभी बड़े आढ़तियों की है। कई नामी आढ़तिए अलवर के आढ़तियों से सम्पर्क कर रहे हैं। इस बार अलवर की प्याज की देश भर में भारी मांग बनी हुई है।
बीते वर्ष अलवर में प्याज के थोक भाव 100 रुपए प्रति किलो तक रहे हैं। दक्षिण भारत और मध्य प्रदेश के कई प्याज उत्पादक क्षेत्रों में बरसात के अधिकता के चलते यह फसल खराब हो गई है। ऐसे में सब की निगागे अलवर जिले पर ही है। इस बारे में प्याज के आढ़ती जितेन्द्र सैनी कहते हैं कि इस बार प्याज के भाव कम होने के आसार नहीं है। बाहर के आढ़तिएं यहां के बाजार पर नजर रखे हुए हैं।
अलवर जिलें की प्याज प्रदेश ही नहीं पूरे देश के लोगों के स्वाद का जायका बढाती है। गत वर्ष देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ के कारण जिलें का किसान प्याज के अच्छे भाव मिलने के कारण निहाल हो गया था और उसी मुनाफे की आस में इस बार भी किसानों ने तरजीह देकर प्याज की बुवाई की है। इस बार 25 हजार हैक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई है जो बीते वर्ष से अधिक है।
किसी प्रकार का रोग नहीं-
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक लीलाधर जाट कहते हैं कि इस बार प्याज में किसी तरह का कोई रोग या प्रकोप देखने को नहीं मिला है, जिससे प्याज की पैदावार इस बार अच्छी होने की संभावना है। हांलाकि जिलें के कुछ भागों में तापमान की बढोतरी के कारण थोडा बहुत नुकसान की आश्ंाका है।
गत वर्षो में देखा गया है कि जिलें के किसान नगदी फसल के रूप में कपास और प्याज की फसल को अधिक पसन्द कर रहे है। कपास की फसल में बेमौसम बारिश और अब तापमान की अधिकता से उत्पादन पर कुछ विपरीत प्रभाव पडा है, परन्तु किसानों को प्याज की फसल को लेकर अभी भी आस जगी है कि प्याज की फसल उनके कपास के नुकसान की भरपाई कर देगी ।