राजस्थान में पंचायत चुनावों से ठीक पहले अलवर जिला परिषद ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। 16 पंचायत समितियों में विकास कार्यों के बजट में करीब 4.65 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है। इसके चलते 300 से अधिक पूर्व सरपंच और पूर्व उप सरपंचों के चुनाव लड़ने पर संकट मंडरा गया है।

Panchayat Election News: अलवर और खैरथल-तिजारा जिला समेत बहरोड़ के 300 से अधिक पूर्व सरपंच व पूर्व उप सरपंच आगामी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इन पर विकास कार्य के लिए भेजी गई राशि को गबन करने का आरोप है। अलवर जिला परिषद की ओर से इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि ये जब तक गबन की राशि जमा नहीं कराएंगे, तब तक इनको चुनाव लड़ने के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) नहीं दी जाएगी। गबन की राशि जमा न कराने पर प्रॉपर्टी भी सीज की जा सकती है।
पिछले 20 साल में गांवों के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार से करोड़ों रुपए भेजे। यह राशि ग्राम पंचायतों के खाते में पहुंची, तो जनप्रतिनिधियों ने इसे ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। ऑडिट में खुलासा हुआ कि 16 पंचायत समितियों के 633 मामले ऐसे हैं, जिन्होंने 4.65 करोड़ रुपए का गबन किया गया। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, रामगढ़ व लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति से जुड़ी ग्राम पंचायतों में 4 करोड रुपए से अधिक का गबन हुआ।
कार्रवाई की जद में आ रहे सभी पूर्व सरपंचों व पूर्व उप सरपंचाें से वसूली करने की संस्तुति की गई थी। शुरुआत में इनमें से कुछ ने राशि जमा कर दी, लेकिन शेष ने अब तक ऐसा नहीं किया। अब ये सभी पंचायती राज चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच जिला परिषद की ओर से नोटिस जारी होने से इनकी नींद उड़ी हुई है। एनओसी नहीं मिलेगी, तो ये चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
पिछले 20 साल के दौरान ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों में 50 हजार से अधिक के 602 गबन और 50 हजार रुपए से अधिक के 31 गबन के मामले सामने आए थे। कुछ मामलों में वसूली हुई, जो बहुत कम राशि की है। इस दौरान 20 साल तक जिला परिषद के एक-दो ही अधिकारियों ने पत्राचार किया, लेकिन एक्शन किसी ने नहीं लिया गया।
पंचायती राज विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक, वसूली से बचने के लिए ज्यादातर पूर्व सरंपच व उप सरपंच अपने ही परिवार के दूसरे सदस्य को चुनाव में खड़ा कर देते हैं।
ऑडिट टीम की संस्तुति के आधार पर गबन के मामलों में वसूली होगी। इन सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर संपत्ति भी सीज होगी। चुनाव से पहले यदि गबन करने वाले एनओसी मांगेंगे, तो बिना राशि जमा किए, एनओसी जारी नहीं की जाएगी - सालुखे गौरव रविंद्र, सीईओ, जिला परिषद