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अलवर में क्या वोट के लिए हो रही है बयानबाजी? पढि़ए अलवर की मौजूदा स्थिति पर तरकश

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Updated: 10 Aug 2018, 11:30 AM IST
Alwar Patrika Tarkash On Alwar's Present Condition
अलवर में क्या वोट के लिए हो रही है बयानबाजी? पढि़ए अलवर की मौजूदा स्थिति पर तरकश

ले की शांति भंग करने के लिए इस समय कुछ लोगों ने दिन-रात एक किया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए है। कुछ लोग पंचायती कर रहे हैं। कुछ कोरी नेतागिरी के नाम पर बयानों की आग उगलकर माहौल भडक़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह शांतिभंग करने के अलावा क्या है? हर आम और खास को पता है कि यह सब वोटों की खातिर किया जा रहा है। किसी को उपचुनावों की कसक है। किसी को आगामी चुनावों की तैयारियों की ललक है। इससे न जनता का भला है न गाय का। मूल संगठन वास्तव में सतत काम कर रहे हैं। उनके लोकतांत्रिक प्रदर्शन हर बार की तरह मर्यादा में रहते हैं। हालांकि उनके उठाए सवाल तथ्यपरक भी हैं।

इसे अलवर का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यहां आग बुझाने की बजाय लगाने वाले ज्यादा हैं। देश में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जहां भी मौजूदा हालात पर चर्चा होती है। वहां अलवर का नाम सबसे पहले आता है। अफसोस की बात ये है कि अलवर लगातार नकारात्मक सुर्खियों में बना हुआ है। इन हालात को आखिर पलटेगा कौनï? कहां गई पुलिस की शांति समितियां? असल में पुलिस ही कहां गई है? यह सवाल अधिक कचोटता है। इसके समानांतर जिला प्रशासन की अदृश्यता भी सवालों के घेरे में है। गोकशी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जिला जब देखो तब उबलता रहता है।

बाहर के लोग अलवर का नाम लेकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। जबकि अलवर के वास्तविक हालात से उनको कोई सरोकार नहीं है। जिम्मेदार प्रशासन होता तो यह सब संभव नहीं है। प्रशासन से सवाल हैं? आखिर गोकशी को इतने हल्के में क्यों लिया जा रहा है? हरियाणा या बाहर से आकर लोग अलवर का इस्तेमाल गोतस्करी के लिए क्यों करते हैं? क्या इसमें कुछ स्थानीय लोगों की मिलीभगत है? आए दिन कुछ लोगों की मिलीभगत के खुलासे होने के बाद क्या प्रशासन ने कोई अभियान चलाया? क्या कभी रात्रि चौपाल उन इलाकों में जाकर करी है जो गोतस्करी और गोकशी के लिए बदनाम हैं? डॉ. जाकिर हुसैन सोशल एंड वेलफेयर सोसायटी की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए? विश्व हिंदू परिषद और संबंधित अन्य संगठन गांवों में गोग्रास जैसे कार्य कर रहे हैं। गाय के लिए कई गांवों में लोगों ने आगे बढकऱ सेवा कार्य शुरू किए हैं। इनकी प्रेरणा से गोशालाओं को लोग सहयोग कर रहे हैं। इन दिनों यह सहयोग बढ़ा है।

सडक़ों पर अब भी बड़ी संख्या में लावारिस गाय नजर आती हैं। तस्करों के लिए ऐसी निरीह गाएं आसान शिकार हैं। अब इन्हें गोशालाओं तक पहुंचाया भी जा रहा है। वहां भी साधन सीमित हैं। नंदी शाालाएं खुलना भी अच्छा संकेत हैं। समाज के साथ ही सरकार को भी अलवर की विशेष स्थिति देखते हुए विशेष प्रयास करने चाहिए। यह जरूर है कि हम सभी को बयानवीरों से बचने का प्रयास करना होगा। यह अलवर की शांति के लिए जरूरी है।

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10 Aug 2018, 11:30 AM IST
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