अलवर

पुलिस अधिकारी ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अपने घर से करवाई दो गरीब बेटियों की शादी

अलवर के राजगढ़ में मानवता और सामाजिक समरसता की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली है। यहां थानाधिकारी भगवान सहाय मीना ने दो ऐसी गरीब बेटियों का विवाह अपने घर से पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया, जिनके सिर से मां का साया उठ चुका था। पुलिस अफसर की इस पहल ने समाज को संवेदनशीलता का बड़ा संदेश दिया है।

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May 08, 2026
पूरे रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न करवाया (फोटो - पत्रिका)

राजगढ़ क्षेत्र के ग्राम पलवा में हाल ही में एक ऐसा नजारा दिखा जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। जमवारामगढ़ में तैनात थानाधिकारी भगवान सहाय मीना ने पुलिस की वर्दी के पीछे छिपी अपनी मानवीय संवेदनाओं को उजागर करते हुए दो निर्धन बेटियों के जीवन में खुशियां भर दी। इन बेटियों की मां इस दुनिया में नहीं रही थीं और पिता मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से परिवार का पेट पाल रहे थे। ऐसे में इन बेटियों की शादी की चिंता परिवार पर पहाड़ बनकर टूटी हुई थी।

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पूरे रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न करवाया

मुसीबत की इस घड़ी में भगवान सहाय मीना और उनकी पत्नी मुस्कान मीना इन बेटियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आए। उन्होंने किसी बाहरी मदद का इंतजार करने के बजाय अपने ही निवास स्थान को बेटियों का मायका बनाने का फैसला किया। उन्होंने न केवल आर्थिक मदद की, बल्कि पिता और परिवार की भूमिका निभाते हुए पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ दोनों बेटियों का विवाह संपन्न करवाया।

गांव बना गवाह, हर तरफ हो रही सराहना

इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल थानाधिकारी का परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव और आसपास के लोग भी एक परिवार की तरह शामिल हुए। सभी ने अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियां निभाईं, जिससे यह आयोजन केवल एक विवाह न रहकर सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गया। विदाई के समय वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं, लेकिन सभी के चेहरों पर इन बेटियों के सुरक्षित भविष्य को लेकर एक सुकून और खुशी भी साफ दिखाई दे रही थी।


भगवान सहाय मीना हमेशा से ही सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहे हैं, और उनकी पत्नी मुस्कान मीना भी लगातार जरूरतमंदों की सेवा में जुटी रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग अपनों की मदद से भी कतराते हैं, वहां एक पुलिस अधिकारी ने पराई बेटियों को अपना मानकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

बेटियों की मुस्कान ही सबसे बड़ा सौभाग्य

अपनी इस पहल पर बेहद विनम्रता से बात करते हुए भगवान सहाय मीना ने कहा कि जरूरतमंद बेटियों की मदद करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने आगे कहा कि अगर हमारे एक छोटे से प्रयास से किसी दुखी परिवार के चेहरे पर मुस्कान आती है, तो उनके लिए इससे बड़ा सौभाग्य और कुछ नहीं हो सकता। एक पुलिस अधिकारी की यह संवेदनशीलता अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह शादी मानवता, अपनापन और सामाजिक जिम्मेदारी का ऐसा संदेश है, जो आने वाले लंबे समय तक लोगों के दिलों में प्रेरणा बनकर जिंदा रहेगा।

Published on:
08 May 2026 02:09 pm
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