
representative picture (AI)
Lucknow Fire Accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे से सबक लेते हुए राजस्थान सरकार और स्थानीय प्रशासन एक्शन में आ गए हैं। राजधानी जयपुर में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 20 कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों को सील कर दिया गया।
वहीं, भीलवाड़ा में नगर निगम ने नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 2 होटल, 1 कोचिंग संस्थान और 1 रेस्टोरेंट को सीज कर दिया है, जबकि 10 अन्य कोचिंग सेंटरों को कड़ा नोटिस थमाया है। बीकानेर में भी बिना फायर एनओसी (NOC) के चल रही 10 से ज्यादा लाइब्रेरियों पर गाज गिरी है।
प्रदेश के बाकी जिलों में जहां हड़कंप मचा है, वहीं अलवर जिला प्रशासन और नगर निगम हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अलवर के नयाबास, भगत सिंह सर्किल, मालवीय नगर, स्कीम-2, स्कीम-8, मोती नगर और मोती डूंगरी जैसे पॉश और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धड़ल्ले से बेसमेंट और संकरी इमारतों में कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरियां चल रही हैं। इन जगहों पर हर दिन हजारों छात्र अपने भविष्य को संवारने आते हैं, लेकिन उन्हें क्या पता कि वे सीधे मौत के कुएं में बैठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन इलाकों में ये अवैध निर्माण और बिना सुरक्षा मानकों के संस्थान चल रहे हैं, वहां से नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां रोज गुजरती हैं। इसके बावजूद अधिकारी अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। शहर की अधिकांश कमर्शियल इमारतों में 'इमरजेंसी एग्जिट' (आपातकालीन निकासी) का नामोनिशान तक नहीं है। कई भवनों की सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि यदि भगवान न करे कोई हादसा हो जाए, तो दो लोग भी एक साथ बाहर नहीं भाग सकते।
हैरानी की बात यह है कि इन संकरी इमारतों में वेंटिलेशन (हवा आने-जाने का रास्ता) तक नहीं है और दरवाजे इतने छोटे हैं कि दम घुटने का खतरा हमेशा बना रहता है। शहर के अधिकांश कोचिंग और लाइब्रेरी संचालकों के पास फायर विभाग की एनओसी तक नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या अलवर प्रशासन भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इन अवैध और असुरक्षित संस्थानों पर ताला नहीं जड़ा गया, तो लखनऊ जैसा कोई बड़ा हादसा अलवर में भी दोहराया जा सकता है, जिसका खामियाजा मासूम छात्रों को भुगतना पड़ेगा।
Published on:
24 Jun 2026 11:29 am
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