
अलवर. मोबाइल चोरी के मामले में यदि आप पुलिस से माल बरामदगी की उम्मीद लगाए बैठे हैं तो यह आपकी भूल होगी। पहले तो पुलिस मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी। यदि दर्ज करनी भी पड़ी तो वह गुमशुदगी में दर्ज होगी।
अब पुलिस ने मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने से बचने का नया तरीका निकाल लिया है। पुलिस अब ऐसे मामलों में माथापच्ची से बचने के लिए पीडि़त को सीधे ई-मित्र पर भेजने लगी है जबकि ई-मित्र पर चोरी की नहीं बल्कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होती है। इसके अलावा नियम यह भी है कि ऐसे मामलों में पुलिस गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती। ई मित्र तो पीडि़त की सुविधा के लिए हैं, न कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की अनिवार्यता।
स्टिंग में हुआ खुलासा
मोबाइल चोरी के मामलों में पुलिस की तत्परता व थानों में पुलिस के व्यवहार को जानने के लिए मंगलवार को कोतवाली व एनईबी थाने में स्टिंग किया। इस दौरान एक युवक को मोबाइल चोरी की रपट दर्ज कराने भेजा गया। खास बात ये रही कि दोनों थानों में मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने को कोई तैयार नहीं हुआ। उल्टे परिवादी पर ही पुलिसकर्मियों ने ‘मोबाइल चोरी हुआ है या तूने खो डाला’ के आरोप जड़ डाले। बाद में दोनों थानों में पुलिसकर्मियों ने परिवादी से साफ-साफ कहा कि यहां मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती। ई-मित्र पर जाओ।
ये है चोरी व गुमशुदगी में अन्तर
मोबाइल चोरी की गुमशुदगी में रपट दर्ज करने के पीछे प्रमुख कारण पुलिस का माथापच्ची से बचना है। दरअसल, चोरी यानि अपराध में पुलिस को कम से कम आईपीसी की धारा 379 में मामला दर्ज करना पड़ता है। इसमें बयान, नक्शा मौका, पूछताछ, बरामदगी सहित अन्य कार्रवाई करनी पड़ती है। पुलिस की मासिक रिपोर्ट में भी कार्रवाई विवरण देना पड़ता है। जबकि गुमशुदगी यानि मिस्टेक में पुलिस को मात्र रोजनामचे में रपट दर्ज करनी पड़ती है। ऐसे प्रकरण पुलिस की मासिक रिपोर्ट में भी शामिल नहीं होते।