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Ncr New Gazette Notification: अलवर को नहीं मिली NCR से मुक्ति: केंद्र का नया गजट नोटिफिकेशन जारी, उद्यमियों में भारी निराशा

Ncr New Gazette Notification: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर निकलने की उम्मीद लगाए बैठे अलवर के लोगों और उद्यमियों को बड़ा झटका लगा है। भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने नया गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसमें अलवर के दायरे को जस का तस रखा गया है। केवल नए जिलों के हिसाब से एरिया बांटा गया है।
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Jul 04, 2026
Ncr New Gazette Notification
representative picture (AI)

Ncr New Gazette Notification: भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसमें अलवर का एरिया यथावत रखा गया है। केवल इसे नवगठित जिलों के आधार पर विभाजित कर दिया गया है। नए जिले खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ में वही एरिया एनसीआर में रखे गए हैं, जो पूर्व में शामिल थे।

पहले से एनसीआर से बाहर चल रहे कोटपूतली, विराटनगर, पावटा तहसील अब भी बाहर रखी गई हैं। दरअसल, एनसीआर नोटिफिकेशन की अवधि वर्ष 2021 में पूरी हो गई थी। ऐसे में अब नए जिलों के अनुसार नया नोटिफिकेशन जारी हुआ है, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इधर, उद्यमियों ने इस नोटिफिकेशन पर निराशा जाहिर की है।

देरी से जारी हुआ नोटिफिकेशन

दरअसल, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने एनसीआर का गजट नोटिफिकेशन वर्ष 2013 में किया था, जो वर्ष 2021 तक था। अवधि पूरी होने के बाद नया गजट नोटिफिकेशन होना था, लेकिन देरी हुई, जो अब जारी किया गया है। करीब 13 साल में अलवर में प्रशासनिक इकाइयों में काफी बदलाव हुआ।

अलवर से अलग होकर खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ जिला बनाया गया। नई तहसीलें बनाई गईं। इस आधार पर जिले वाइज एरिया को शामिल करते हुए एनसीआर का गजट नोटिफिकेशन किया गया है, जो पुराने अलवर जिले में एरिया शामिल थे, वह सभी एनसीआर में हैं।

एनसीआर से बाहर क्यों निकलना चाहता है अलवर?

एनसीआर का जब से गठन हुआ है, तभी से अलवर जिला इसमें शामिल है। शुरुआत में एनसीआर के विकास के लिए पीपीपी मॉडल पर लोन दिया गया और यहां सड़कों का निर्माण हुआ। उसके बाद दिल्ली में प्रदूषण बढ़ना शुरू हुआ, तो ग्रेप की पाबंदियां लगनी शुरू की गई। अलवर तक इसका असर आया, जबकि यहां प्रदूषण अधिक नहीं था।

करीब 1200 कंपनियों में उत्पादन प्रभावित होने लगा, तो उद्यमियों ने विरोध किया। यहां के छोटे-छोटे उद्योग प्रभावित होने लगे। सरकारी व निजी कार्यों पर रोक लगने लगी। इसी को लेकर आवाज उठाई गई कि बिना प्रदूषण के अलवर यह पाबंदियां क्यों झेले? अलवर को एनसीआर से बाहर किया जाए। काफी समय से यह मांग उठी रही थी, लेकिन इसका असर नोटिफिकेशन में नजर नहीं आया।

नए गजट के मुताबिक एनसीआर में ये एरिया शामिल

पूरा अलवर जिला शामिल किया गया है, जिसमें गोविंदगढ़, रैणी, लक्ष्मणगढ़, मालाखेड़ा, राजगढ़, टहला, रामगढ़, नौगांवा, थानागाजी, प्रतापगढ़ व कठूमर तहसील शामिल हैं।
खैरथल-तिजारा जिला पूरा शामिल है, जिसमें तिजारा, किशनगढ़बास, खैरथल, कोटकासिम, हरसोली, टपूकड़ा व मुंडावर का एरिया शामिल है।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की बहरोड़, बानसूर, नीमराणा, मांढण व नारायणपुर तहसील शामिल हैं। कोटपूतली, विराटनगर व पावटा तहसील क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।


एनसीआर नोटिफिकेशन की अवधि वर्ष 2021 में पूरी हो गई थी। उसी के अनुसार नया नोटिफिकेशन हुआ है। अलवर व भरतपुर का जो एरिया पहले शामिल था, वह यथावत है। नया एरिया न जोड़ा गया और न कम किया गया। नए जिले जो बनाए गए हैं, उनके एरिया शामिल हैं। अलवर को एनसीआर से बाहर करने का हमारे पास न कोई प्रस्ताव आया और न यह आसान प्रक्रिया है। बीच में जरूर 100 किमी तक एनसीआर करने की बातचीत चली थी, लेकिन उस पर अभी कोई मुहर नहीं लगी है - रवि राय वर्मा, सीटीपी एनसीआर, जयपु

एनसीआर से अलवर बाहर नहीं हुआ, जबकि 100 किमी के एरिया में यह क्षेत्र आता भी नहीं है। भिवाड़ी और किशनगढ़बास अब अलवर जिले से अलग हो गए। ऐसे में अलवर को भी एनसीआर से मुक्ति मिलनी चाहिए थी, लेकिन गजट नोटिफिकेशन में राहत की खबर नहीं आई, जिससे मायूसी हाथ लगी है। इस मामले को फिर से प्रमुखता से उठाएंगे। नेताओं के साथ बैठक करेंगे। ग्रेप की पाबंदियां अलवर क्यों झेले, जबकि यहां प्रदूषण है ही नहीं - मनोज गुप्ता, अध्यक्ष, एमआइए उद्योग संघ, अलवर

Updated on:
04 Jul 2026 02:24 pm
Published on:
04 Jul 2026 02:24 pm