
रामकथा आयोजन सेवा समिति की ओर से जयकृष्ण क्लब परिसर स्थित फोर सीजन बैंक्वेट में आयेाजित की जा रही रामकथा में राम भगवान व उनके भाईयों के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक संत मुरलीधर ने कथा के दौरान बताया कि राजा वह होता है जो प्रजा के हित की बात सोचें । जिनके जीवन की रक्षा प्रभु राम करते हैँ उनको जीवन में कोई परेशानी नहीं आ सकती । जीवन में यदि किसी के सुख लिखा है तो दुनिया की कोई ताकत नहीं जो उसे दुखी कर सकें। लेकिन जिसके भाग्य में दुख है उसको सुख नहीं मिल सकता। यह अटूट सत्य है। इसलिए प्रभु राम की भक्ति ही दुखों से पार दिला सकती है।
कथा के दौरान भगवान राम को विश्वामित्र के साथ वन में भेजने का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राजा दशरथ से गुरु विश्वामित्र ने राम व लक्ष्मण को वन में ले जाने की आज्ञा मांगी तो राजा ने कहा कि मेरे प्राण ले लो, लेकिन इनको मुझसे मत मांगों। राघव को मुझ से मत मांगों, राघव को मैं ना दूंगा। हे मुनिराज इनमें मेरे प्राण बसे हुए हैं। लेकिन जब राजा दशरथ को गुरु वशिष्ठ ने समझाया कि विश्वामित्र यदि क्रोधित होकर कोई श्राप दे देंगे तो आप सहन नहीं कर पाओगे। ये स्वयं इतने शक्तिशाली है कि स्वयं कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी राम को आप से मांग रहे हैं तो इसमें कोई ना कोई रहस्य की बात अवश्य ही है। इसके बाद अति आदर के साथ राजा दशरथ ने प्रभु राम व लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेज दिया। सरयू नदी के तट पर पहुंचते ही सबसे पहले ताडका राक्षसी से सामना हुआ तो ऋषि विश्वामित्र के कहने पर भगवान राम ने एक ही तीर से ताडका का वध कर दिया।
कथा के दौरान भोजन समिति, जल व्यवस्था समिति तथा स्काउट की छात्राओं को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। आमंत्रित सदस्यों में ज्योति गैस की प्रबंधक रेशम मान, नीलेश खंडेलवाल, एसएस चौधरी, अनिल गुप्ता, मोहित जुडेजा, अंजू सोडी , बालाजी मंदिर के महंत पंडित प्रमेंद्र शर्मा , आदि को सम्मानित किया गया। कथा के यजमान समिति संयोजक महेंद्र तनेजा, अभिषेक तनेजा, आशीष तनेजा, सीए श्रीकृष्ण गुप्ता थे। कथा के समापन पर लक्ष्मी स्वीटस तथा शंकर श्ंाभु एवं शंकर डेयरी की ओर से प्रसाद वितरित किया गया। इसके साथ ही बिजली व्यवस्था के लिए संजय प्रधान, विशेष आमंत्रित सदस्य बसीवाला राखी उद्योग के जगदीश प्रसाद अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन समिति सचिव मुकेश सैनी ने किया।