
अलवर के नीमराणा में तीन दशक पहले भेड़-बकरी पालन का काम रहा
अलवर. बहरोड़-शाहजहांपुर के बीच तीन दशक पहले तक पूरी तरह मिट्र्टी के टीले और पहाड़ों से घिरा अलवर का औद्योगिक क्षेत्र नीमराणा की माटी सोना उगल रही है। यहां देशी-विदेशी कम्पनियों ने करीब 11 हजार करोड़ का निवेश किया है। मतलब डॉलर व येन मुद्रा के भाव जमीनों के लग रहे हैं। निवेश होने के बाद यहां की कम्पनियों में अब तक 27 हजार लोगों को रोजगार मिला है और निवेशकों को पूरा रिर्टन। तभी तो आगे यहां कोरियाई जाने बनाने की तैयारी पूरी हो गई। दिनोंदिन गांवों की जमीन पर फैक्ट्रियां फैलती जा रही हैं।
नीमराणा से निकले रहे नेशनल हाईवे संख्या आठ पर करीब एक दर्जन से अधिक गांवों की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विस्तार लेता हुआ 1.78 करोड़ वर्गमीटर में फैल चुका है। जिसमें अकेला जापानी जोन ही करीब 47 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में हैं। जापानी जोन में पांच हजार 808 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। यही पर 210 एकड़ जमीन पर औद्योगिक निर्यात संवर्धन पार्क (ईपीआईप) विकसित हो चुका है। घिलोट में 1846 एकड़ जमीन पर कोरियाई जोन भी तैयार हो चुका है। हालांकि फिलहाल इसमें जनरल जोन के रूप में 125 बड़ी इकाइयों को जमीन आवंटित की जा चुकी है। 20 इकाइयों विकसित हो रही हैं। कोलीला जोगा में भी 201 एकड़ जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र का विकास कार्य हो रहा है। इन सबसे पहले नीमराणा का पुराना औद्योगिक क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है। जिसमें कई हजार फैक्ट्रियां में 17 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जापानी जोन में 11 हजार 589 सहित पूरे नीमराणा में करीब 28 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
यहां बसे उद्योग:
नीमराणा का माधोसिंह पुरा, प्रतापसिंहपुरा, ईपीआईपी प्रतापसिंह पुरा व मोलडिया, जापानी जोन माजराकाठ, माधोसिंपुरा, काली पहड़ी, जनक सिंह पुरा आदि गांवों की जमीन पर बसा हुआ है। अब इन अधिकतर गांवों में डीएलसी दर दस साल पहले की तुलना में करीब चार गुना बढ़ चुकी है। यूआईटी के जरिए मान्यता प्राप्त कॉलोनियेां में जमीनों के भाव 20 हजार रुपए वर्गमीटर से अधिक है। कई दर्जन कृषि भूमि पर कॉलोनियां बस चुकी है। कृषि भूमि की कॉलोनियों में जमीनों के भाव प्रॉपर्टी डाउन आने के बाद नीचे गिर गए हैं।